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शिक्षा विभाग में बड़ा विवाद – खण्ड शिक्षा अधिकारी पर महिला शिक्षिका ने लगाए शोषण और भ्रष्टाचार के आरोप

      एक्सक्लूसिव

गजेन्द्र सिंह (ख०शि०अ०) पर सनसनीखेज आरोप
“जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई, महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर मेरा विशेष ध्यान रहेगा” – बीएसए सचिन कसाना
 बिजनौर में शिक्षा विभाग पर बड़ा विवाद – खण्ड शिक्षा अधिकारी पर महिला शिक्षिका ने लगाए शोषण और भ्रष्टाचार के आरोप
तब की स्मार्ट क्लास
तब की स्मार्ट क्लास,अब कबाड़खाना
  • तीन सालों तक लगातार वसूली और धमकियों का आरोप

  • कॉल रिकॉर्डिंग, चैट और यूपीआई ट्रांजेक्शन बतौर सबूत पेश

  • शिक्षिका का दावा – निलंबन, टर्मिनेशन और चरित्र हनन से मानसिक रूप से टूटी

  • बीएसए ने कहा – “जांच शासन को भेज दी गई है, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा”

 केस का बैकग्राउंड

चान्दपुर खण्ड शिक्षा अधिकारी (ख०शि०अ०) गजेन्द्र सिंह पर कम्पोजिट विद्यालय कटकुई नगर क्षेत्र की शिक्षिका आयशा खातून ने 2022 से अब तक लगातार उत्पीड़न और आर्थिक शोषण के आरोप लगाए हैं। शिक्षिका का कहना है कि विवाद खड़ा कर उनसे बार-बार ₹50,000 की वसूली की गई और न देने पर निलंबन, ट्रांसफर या जिला बदर कराने की धमकी दी जाती रही।

 मुख्य आरोप (हाइलाइटर)

  • 📌 बार-बार अवैध वसूली : तीन बार ₹50,000 की जबरन मांग और भुगतान।
  • 📌 मानसिक प्रताड़ना : अनऑफिशियल कॉल, अशोभनीय मैसेज और लगातार धमकियाँ।
  • 📌 चरित्र हनन : विभागीय मीटिंग्स और सहयोगियों के बीच “चरित्रहीन महिला” कहकर अपमानित करना।
  • 📌 फर्जी निलंबन : शिक्षामित्रों के जरिए विवाद बढ़ाकर वीडियो वायरल कर निलंबन करवाया।
  • 📌 वित्तीय गड़बड़ी :
    • स्मार्ट क्लास उपकरण ऑफिस ले जाकर उपयोग करना।
    • कम्पोजिट ग्रांट और निर्माण मद की राशि शिक्षामित्रों व परिजनों के खातों में ट्रांसफर।
    • कई अध्यापिकाओं को दबाव बनाकर वीआरएस दिलवाना।
  • 📌 अन्य गंभीर पहलू : इलाहाबाद हाईकोर्ट व महिला आयोग में भी शारीरिक शोषण से जुड़े मामले लंबित।

 सबूतों का दावा

  • कॉल रिकॉर्डिंग और चैट्स : पेन ड्राइव में सुरक्षित।
  • डिजिटल ट्रांजेक्शन : यूपीआई आईडी और खातों में भेजी गई रकम के प्रमाण।
  • विडियो फुटेज : विद्यालय रजिस्टर फाड़ने और विवाद का वीडियो।
  • दस्तावेज़ : विभागीय नोटिस और त्यागपत्र की प्रतियां।

 पीड़िता की व्यथा

आयशा खातून का कहना है कि न०शि०अ० गजेन्द्र सिंह ने उन्हें इस कदर परेशान किया कि कई बार आत्महत्या का विचार आया।
उनका कहना है –
“हर बार मुझसे 50,000 रुपये वसूले गए, मुझे चरित्रहीन कहकर बदनाम किया गया। अब स्थिति ऐसी है कि अपने ही शहर में जीना मुश्किल हो गया है। यदि निष्पक्ष जांच न हुई तो मेरी जान की जिम्मेदारी नगर शिक्षा अधिकारी पर होगी।”

बी ई ओ का स्पष्टीकरण 

टेलीफोनिक वार्ता पर खण्ड शिक्षा अधिकारी गजेन्द्र सिंह ने इन सब आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह सब बनाबटी  हैं। मुझे बदनाम करने की कोशिश का हिस्सा है।

 बीएसए का बयान

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कसाना ने मामले पर स्पष्ट किया –

  • “इस पूरे प्रकरण की जांच कराकर शासन को भेज दी गई है।”
  • “महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर मेरा विशेष ध्यान रहेगा।”
  • “किसी भी तरह का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, दोषियों पर कार्रवाई होगी।”

 बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक शिक्षिका तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा विभाग के अंदर फैले भ्रष्टाचार, दबाव और महिला उत्पीड़न की गंभीर तस्वीर सामने लाता है। सवाल उठता है कि क्या शासन स्तर पर सख्त कार्रवाई होगी और क्या अन्य पीड़ित महिलाओं को भी आवाज़ मिलेगी?

🔺 निष्कर्ष

यह प्रकरण महिला सुरक्षा, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार तीनों पर गहरे सवाल खड़े करता है। अब निगाहें शासन पर हैं कि नगर शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कब और कैसी कार्रवाई होती है।

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