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“त्योहारों पर बिजली कर्मियों का बड़ा ऐलान: आंदोलन भी जारी रहेगा, उपभोक्ताओं को मिलेगी निर्बाध आपूर्ति”

त्योहारों पर बिजली कर्मियों का बड़ा ऐलान: आंदोलन भी जारी रहेगा, उपभोक्ताओं को मिलेगी निर्बाध आपूर्ति”

  • त्योहारों से पहले कर्मचारियों की दो टूक: उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां रोकी जाएं

  • निजीकरण का विरोध 297वें दिन भी जारी, मगर उपभोक्ताओं की सुविधा रहेगी बरकरार

  • फेशियल अटेंडेंस के नाम पर रुका वेतन तत्काल देने की मांग

  • महाकुंभ से लेकर गर्मियों तक रिकॉर्ड आपूर्ति का हवाला

 विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने साफ कहा है कि दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जाएगी, लेकिन निजीकरण के विरोध में आंदोलन भी समानांतर रूप से चलता रहेगा। समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि नवरात्रि से पहले सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए और रोका गया वेतन कर्मचारियों को तत्काल दिया जाए।

संघर्ष समिति ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो विरोध और तेज होगा। साथ ही, मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान हटाए गए अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मियों की बहाली भी तत्काल की जानी चाहिए।

 हाइलाइट्स

  • त्योहारों पर बिजली कर्मियों का वादा → आंदोलन और निर्बाध आपूर्ति साथ-साथ।
  • फेशियल अटेंडेंस विवाद → हजारों कर्मियों का वेतन रुका, त्योहार से पहले भुगतान की मांग।
  • निजीकरण विरोध → पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निर्णय वापस लेने पर जोर।
  • 297 दिन से आंदोलनरत → वाराणसी, आगरा, मेरठ, गोरखपुर समेत कई जिलों में बड़ी सभाएं।
  • कर्मचारियों का योगदान → महाकुंभ व गर्मियों में रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति का हवाला।

 एनालिसिस

उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मियों का निजीकरण के खिलाफ आंदोलन अब 297वें दिन में प्रवेश कर गया है। बावजूद इसके, त्योहारों पर उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए संघर्ष समिति ने स्पष्ट आश्वासन दिया है।

संघर्ष समिति का तर्क है कि जब बिजली कर्मियों ने आंदोलनरत रहते हुए भी महाकुंभ और गर्मियों में रिकॉर्ड आपूर्ति दी है, तो सरकार को भी उनके योगदान को मान्यता देते हुए उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां खत्म करनी चाहिए।

विशेषज्ञ मानते हैं कि निजीकरण को लेकर यह टकराव ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन सकता है। उपभोक्ताओं को राहत देने का भरोसा जहाँ समिति की सकारात्मक छवि दिखाता है, वहीं निजीकरण का विरोध सरकार पर दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।

👉 सवाल यह है कि क्या सरकार त्योहारों से पहले बिजली कर्मियों की इन मांगों पर कोई ठोस कदम उठाएगी, या आंदोलन और सरकार के बीच टकराव आगे और गहराएगा?

 

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