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“लखनऊ में सजा किताबों का महाकुंभ, सीएम योगी बोले – पढ़ने की आदत समाज को नई दिशा देती है”

गोमती बुक फेस्टिवल 2025:

लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षा, संस्कृति और साहित्य का महाकुंभ — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया शुभारंभ

हाइलाइटर

  • लखनऊ विश्वविद्यालय में शुरू हुआ गोमती बुक फेस्टिवल 2025

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन करते हुए कहा – “पढ़ने की आदत समाज को नई दिशा देती है”

  • देश-विदेश के प्रकाशकों, लेखकों और छात्रों का संगम

  • कार्यशालाएँ, पुस्तक विमोचन, कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन

  • नई शिक्षा नीति से जुड़ी पुस्तकों और नवाचार पर विशेष फोकस

मुख्य बिंदु

  • 📌 भव्य उद्घाटन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मंच से किया शुभारंभ।
  • 📌 ज्ञान और संस्कृति का संगम: फेस्टिवल में भारतीय संस्कृति, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और साहित्य की किताबों का संगम।
  • 📌 युवा केंद्रित आयोजन: छात्रों, रिसर्च स्कॉलर्स और नए लेखकों के लिए विशेष सत्र।
  • 📌 प्रकाशन जगत की मौजूदगी: देश-विदेश के प्रमुख प्रकाशक और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म भी हुए शामिल।
  • 📌 सांस्कृतिक आकर्षण: कवि सम्मेलन, नाटक, पेंटिंग एग्जिबिशन और लोकगीतों की गूंज से उत्सव बना बहुरंगी।
  • 📌 सरकारी प्राथमिकता: योगी सरकार का फोकस शिक्षा और संस्कृति के बीच समन्वय बढ़ाने पर।

समाचार विस्तार और विश्लेषण

लखनऊ विश्वविद्यालय का प्रांगण इस समय एक अनोखे उत्सव का गवाह बन गया है। गोमती बुक फेस्टिवल 2025 न सिर्फ साहित्य प्रेमियों के लिए बल्कि छात्रों, शोधार्थियों और नवोदित लेखकों के लिए भी किसी अवसर से कम नहीं है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन भाषण में कहा कि किताबें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं बल्कि समाज की दिशा और दशा तय करने वाली धरोहर हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे डिजिटल युग में भी पुस्तकों से जुड़े रहें क्योंकि किताबें “मनुष्य को विवेक और संस्कार” देती हैं।

फेस्टिवल का सबसे बड़ा आकर्षण रहा विविधता – जहां एक ओर भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास से जुड़ी किताबें प्रदर्शित की गईं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक विज्ञान, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उद्यमिता पर आधारित पुस्तकों ने युवाओं का ध्यान खींचा।

कार्यक्रमों की झलक

  • पुस्तक विमोचन: कई चर्चित लेखकों ने अपनी नई पुस्तकों का लोकार्पण किया।
  • चर्चा सत्र: शिक्षा नीति, महिला सशक्तिकरण और तकनीक पर आधारित पैनल डिस्कशन।
  • कला-संस्कृति: कवि सम्मेलन, कहानी पाठ, नुक्कड़ नाटक और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियाँ।
  • युवा मंच: छात्र-लेखकों को अपने विचार और रचनाएँ प्रस्तुत करने का मौका।

समाज और शिक्षा पर प्रभाव

यह बुक फेस्टिवल केवल साहित्यिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का वाहक भी माना जा रहा है।

  • यह पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करेगा।
  • शिक्षा और उद्यमिता को जोड़ने वाले नए विचार सामने आएंगे।
  • नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने का व्यावहारिक मंच बनेगा।
  • युवाओं को “नवाचार + परंपरा” का संतुलित मॉडल देखने को मिलेगा।

पब्लिक कनेक्ट

लखनऊ के लोग इस आयोजन को एक उत्सव की तरह मना रहे हैं। परिवार, छात्र, शिक्षक और शोधकर्ता यहां न सिर्फ किताबें खरीद रहे हैं बल्कि लेखकों से संवाद कर प्रेरणा भी ले रहे हैं।

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