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सीएम योगी ने 1,647 थानों में मिशन शक्ति केंद्रों का उद्घाटन किया, SOP पुस्तिकाओं का विमोचन भी

मिशन शक्ति 5.0: यूपी में महिला सशक्तिकरण की नई उड़ान”

सीएम योगी ने 1,647 थानों में मिशन शक्ति केंद्रों का उद्घाटन किया, SOP पुस्तिकाओं का विमोचन भी

https://youtu.be/JQ8pgUXmG2g

कागज से जमीन तक: SOP पुस्तिकाएं बदलेंगी पुलिस की कार्यशैली?”

हाइलाइट्स

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन शक्ति-5.0 का किया शुभारंभ
  • प्रदेश के सभी 1,647 थानों में मिशन शक्ति केंद्र शुरू
  • मिशन शक्ति केंद्रों से संबंधित SOP पुस्तिकाओं का विमोचन
  • महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन पर जोर
  • विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद

लखनऊ से बड़ी खबर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लोक भवन सभागार में शनिवार, 20 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने “मिशन शक्ति-5.0” का भव्य शुभारंभ किया। इस दौरान पूरे प्रदेश के 1,647 थानों में नवस्थापित मिशन शक्ति केंद्रों का उद्घाटन कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संदेश दिया।

सीएम योगी ने कहा कि “नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन” राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मिशन शक्ति कार्यक्रम इसी सोच का मजबूत स्तंभ है।

 SOP पुस्तिकाओं का विमोचन

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मिशन शक्ति केंद्रों के लिए तैयार की गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) पुस्तिकाओं का विमोचन किया। इन पुस्तिकाओं में महिलाओं की शिकायतों, परामर्श और त्वरित कार्रवाई की पूरी कार्यप्रणाली को विस्तार से बताया गया है।

 लाभार्थियों से संवाद

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने विभिन्न योजनाओं जैसे महिला स्वयं सहायता समूह, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या सुमंगला योजना आदि से लाभान्वित महिलाओं से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि हर महिला आत्मनिर्भर बने और हर बेटी सुरक्षित रहे।

 विश्लेषण

  • राजनीतिक संदेश: मिशन शक्ति 5.0 न सिर्फ महिला सुरक्षा का ढांचा मजबूत करने का प्रयास है बल्कि यह सरकार के “गुड गवर्नेंस” एजेंडे का हिस्सा भी है।
  • जमीनी असर: थानों में स्थापित मिशन शक्ति केंद्र महिलाओं को तुरंत कानूनी मदद, काउंसलिंग और सुरक्षा का ठोस मंच प्रदान करेंगे।
  • सामाजिक प्रभाव: SOP पुस्तिकाओं से पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर कार्यप्रणाली और जवाबदेही और अधिक पारदर्शी होगी।
  • चुनौती: योजनाओं का सही क्रियान्वयन और थानों में संवेदनशीलता का माहौल बनाना सबसे बड़ी कसौटी होगा।

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