“निजी हाथों में जाएगी बिजली?” — मुंबई की ‘डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025’ पर बवाल
यूपी विद्युतकर्मियों ने उठाया बड़ा सवाल: निजीकरण की पटकथा पहले से लिखी जा चुकी है क्या?
मुख्य बातें (Highlights)
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4-5 नवंबर को मुंबई में होगी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025
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मुख्य एजेंडा: बिजली वितरण निगमों का निजीकरण
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आयोजक: इंडियन स्मार्ट ग्रिड फोरम — एक निजी संस्था
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मेजबान कंपनियां: टाटा पावर, बीएसईएस राजधानी, बीएसईएस यमुना (रिलायंस ग्रुप)
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यूपी पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल पर हितों के टकराव (Conflict of Interest) का गंभीर आरोप
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यूपी के 296वें दिन के आंदोलन में पूरे प्रदेश में जोरदार प्रदर्शन
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संघर्ष समिति ने महाराष्ट्र के बिजली कर्मियों से भी मीट के खिलाफ एकजुट होने की अपील की
निजीकरण का बड़ा खेल?
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश का आरोप है कि मुंबई में होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 महज एक कॉरपोरेट शो है, जहां बड़े निजी घराने बिजली क्षेत्र को अपने कब्ज़े में लेने की तैयारी कर रहे हैं।
इस मीट का आयोजक इंडियन स्मार्ट ग्रिड फोरम है, जो सोसायटी एक्ट में पंजीकृत एक निजी संस्था है। समिति का कहना है कि इसके वेबसाइट पर ही साफ लिखा है कि इसका मुख्य एजेंडा निजीकरण को आगे बढ़ाना है।
हितों के टकराव का आरोप
संघर्ष समिति ने यूपी पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- एक ओर वे यूपी में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं।
- वहीं दूसरी ओर वे ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के महामंत्री भी हैं, जिसमें निजी कंपनियों का बोलबाला है।
👉 यह स्थिति सीधे-सीधे कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट मानी जा रही है।
टाटा-पावर-रिलायंस की तैयारी
- मीट के मुख्य होस्ट टाटा पावर हैं, जिनके सीईओ पहले ही कई बार कह चुके हैं कि वे यूपी के पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत निगम को खरीदने के लिए उत्सुक हैं।
- सह-मेजबान हैं बीएसईएस राजधानी पावर और बीएसईएस यमुना पावर, जो रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियां हैं।
इससे साफ संकेत मिलते हैं कि मीट में निजी कंपनियों का दबदबा रहेगा और सरकारी बिजली वितरण को कॉरपोरेट मॉडल में ढालने की कोशिश होगी।
यूपी से महाराष्ट्र तक विरोध की तैयारी
- 2024 में लखनऊ में भी ऐसी ही मीट हुई थी, जिसके बाद कुछ ही दिनों में पूर्वांचल और दक्षिणांचल निगम के निजीकरण की घोषणा कर दी गई थी।
- संघर्ष समिति का कहना है कि अब मुंबई मीट के जरिए न केवल यूपी, बल्कि महाराष्ट्र में भी निजीकरण की तैयारी तेज की जा रही है।
- समिति ने महाराष्ट्र के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे भी इस मीट का पुरजोर विरोध करें।
यूपी में गरजा विरोध
आज यूपी में आंदोलन का 296वां दिन रहा। वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, अलीगढ़, झांसी, बरेली, सहारनपुर, गाजियाबाद समेत दर्जनों जिलों में बिजली कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन किया।
विश्लेषण (Analysis)
- निजीकरण बनाम सार्वजनिक सेवा: सरकारें इसे दक्षता बढ़ाने का मॉडल बताती हैं, लेकिन कर्मचारी इसे ‘कॉरपोरेट लूट’ मानते हैं।
- हितों का टकराव: बड़े अफसरों की दोहरी भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
- राजनीतिक असर: यूपी और महाराष्ट्र दोनों ही राजनीतिक रूप से बड़े राज्य हैं। यहां बिजली का निजीकरण चुनावी मुद्दा बन सकता है।
- सवाल: क्या आम उपभोक्ता के लिए बिजली सस्ती होगी या महंगी?
निष्कर्ष
मुंबई की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 अब केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं रह गई, बल्कि यह देशभर में बिजली निजीकरण की जंग का ट्रिगर पॉइंट बन गई है। यूपी में जारी आंदोलन ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने वाला है।












