अभियन्ता दिवस पर बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से बड़ी अपील
निजीकरण निरस्त करने और विशेषज्ञ अभियन्ताओं को शीर्ष प्रबंधन में जगह देने की मांग
हाइलाइटर
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अभियन्ता दिवस (15 सितंबर) पर बिजली कर्मचारी और अभियंता करेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष अपील।
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ऊर्जा निगमों के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने और विशेषज्ञ अभियन्ताओं को प्रबंधन में शामिल करने की उम्मीद।
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शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को कैशलैस इलाज का तोहफा मिलने के बाद, बिजली कर्मी भी तोहफे की आस लगाए बैठे।
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समिति ने कहा – “महाकुंभ से लेकर भीषण गर्मी तक हर चुनौती पर खरे उतरे बिजली कर्मी।”
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पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के सरकारी क्षेत्र में बने रहने की मांग।
समाचार विस्तार
लखनऊ, 14 सितंबर 2025।
उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं ने 15 सितंबर ‘अभियन्ता दिवस’ को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष तोहफे की उम्मीद जताई है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि मुख्यमंत्री यदि ऊर्जा निगमों में विशेषज्ञ अभियन्ताओं को शीर्ष प्रबंधन में तैनात करने की घोषणा करते हैं तो यह न केवल विद्युत परिषद के स्वर्णिम दौर को लौटाने का कार्य होगा, बल्कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत करेगा।
✦ निजीकरण पर रोक की मांग
समिति ने विशेष रूप से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की अपील की है।
कर्मचारियों का कहना है कि अगर यह फैसला पलटा जाता है तो वे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में 2047 तक “समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश” के सपने को साकार करने में पूरी तरह जुट जाएंगे।
✦ शिक्षक दिवस की तर्ज पर उम्मीद
बिजली कर्मियों ने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को कैशलैस इलाज का तोहफा दिया था। उसी तरह वे अभियन्ता दिवस पर बिजली कर्मियों को सरकारी क्षेत्र में बने रहने का तोहफा देने का निर्णय लें।
✦ बिजली कर्मियों का योगदान
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी हमेशा हर कठिन परिस्थिति में खरे उतरे हैं –
- महाकुंभ के दौरान निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- भीषण गर्मी में देश में सबसे अधिक विद्युत आपूर्ति का रिकॉर्ड बनाना।
- निजी नौकरी छोड़कर सरकारी पावर कारपोरेशन में शामिल हुए अभियन्ताओं की सेवाओं को सुरक्षित रखना।
✦ आकांक्षा और विश्वास
समिति ने दोहराया कि सैकड़ों अभियन्ताओं ने निजी क्षेत्र छोड़कर सरकारी सेवा चुनी ताकि वे प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था में बेहतर योगदान दे सकें। अब उनकी यही अपेक्षा है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत निगम सरकारी क्षेत्र में बने रहें, जिससे वे सेवा पूर्ण कर सकें।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
- यह मांग सिर्फ कर्मचारियों का आंदोलन नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र की स्थिरता और भविष्य की दिशा तय करने का मुद्दा है।
- अगर मुख्यमंत्री अभियन्ता दिवस पर निजीकरण पर पुनर्विचार करते हैं, तो यह निर्णय राजनीतिक और सामाजिक रूप से बड़ा संदेश देगा।
- शिक्षक दिवस पर दी गई सौगात की तरह, अगर अभियन्ताओं को भी उपहार मिलता है तो यह सरकारी कर्मियों के मनोबल को बढ़ाने का कार्य करेगा।
अभियन्ता दिवस 2025 पर बिजली कर्मियों की नज़रें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिकी हैं।
क्या उन्हें भी शिक्षक दिवस जैसा तोहफा मिलेगा?
क्या निजीकरण पर ब्रेक लगेगा?
15 सितंबर का दिन इस सवाल का जवाब तय करेगा।












