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चित्रकूटधाम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया दर्शन-पूजन: कामतानाथ जी से प्रदेशवासियों की खुशहाली की प्रार्थना

चित्रकूटधाम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया दर्शन-पूजन: कामतानाथ जी से प्रदेशवासियों की खुशहाली की प्रार्थना

धार्मिक आस्था और राजनीति का संगम, कामदगिरि पर्वत पर गूंजा राम नाम संकीर्तन

हाइलाइट्स

  • “कामतानाथ जी का आशीर्वाद प्रदेश की समृद्धि का आधार बने” — केशव प्रसाद मौर्य
  •  कामदगिरि पर्वत पर उमड़ा भक्ति और श्रद्धा का सैलाब
  •  धार्मिक मंच से राजनीतिक संदेश: जनता की आस्था से जुड़ाव की कवायद

लखनऊ/चित्रकूट, 14 सितंबर 2025।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को भगवान श्रीराम की तपस्थली चित्रकूटधाम में स्थित सुप्रसिद्ध कामतानाथ गिरि मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने भगवान से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।

मंदिर प्रशासन की ओर से उपमुख्यमंत्री को भगवान का चित्र, श्रीरामचरितमानस और प्रसाद भेंट किया गया। इस अवसर पर मौर्य ने भक्तिमय माहौल में राम नाम संकीर्तन में भी भाग लिया।

 मुख्य आकर्षण

  • 📍 स्थान: चित्रकूटधाम का पवित्र कामदगिरि पर्वत स्थित कामतानाथ गिरि मंदिर
  •  दर्शन-पूजन: उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया भगवान के समक्ष आशीर्वाद हेतु प्रार्थना
  • सौगात: मंदिर व्यवस्थापक संत मदन गोपाल दास ने भेंट किया चित्र, रामचरितमानस और प्रसाद
  • भक्ति माहौल: राम नाम संकीर्तन में उपमुख्यमंत्री की सहभागिता
  • विशिष्ट उपस्थिति: पूर्व राज्यमंत्री सी.पी. उपाध्याय, पूर्व सांसद आर.के. पटेल, पूर्व विधायक आनंद शुक्ला, महेंद्र कोटार्य, कोऑपरेटिव बैंक अध्यक्ष पंकज अग्रवाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद

धार्मिक और राजनीतिक महत्व

चित्रकूटधाम न केवल धार्मिक दृष्टि से पावन स्थल है, बल्कि भारतीय राजनीति के लिए भी इसका विशेष महत्व है।

  • यह स्थल श्रीराम के वनवास का प्रमुख केंद्र रहा है, जिसे भक्तजन अत्यधिक श्रद्धा से देखते हैं।
  • नेताओं की लगातार मौजूदगी इस बात को भी दर्शाती है कि धार्मिक आस्था और जनभावनाओं से जुड़ना राजनीति की अहम कड़ी बन चुकी है।
  • उपमुख्यमंत्री की इस यात्रा को आने वाले चुनावी परिप्रेक्ष्य में जनसंपर्क और आस्था आधारित राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है।

चित्रकूटधाम की यह आध्यात्मिक यात्रा उपमुख्यमंत्री मौर्य के लिए केवल धार्मिक पूजन-अर्चन भर नहीं रही, बल्कि यह जनभावनाओं से सीधा संवाद और आस्था के माध्यम से जनता के करीब आने का प्रयास भी माना जा रहा है।

 

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