बिजनौर का गंगा बैराज खतरे में !
कटान से कमजोर हुआ बंधा, प्रशासन ने धारा मोड़कर संभाले हालात
https://youtu.be/GUfq7egT254
https://youtu.be/JSLSAJYf2lk
इरिगेशन विभाग की सुस्ती से खड़ा हुआ संकट — एडीएम वान्या सिंह की त्वरित कार्रवाई से मिली फिलहाल राहत, लेकिन स्थायी समाधान की मांग तेज
ताज़ा अपडेट (Highlights)
-
गंगा बैराज की बाउंड्री तेज कटान की चपेट में।
-
खतरे की सूचना पर एडीएम वान्या सिंह सुबह से मौके पर डटीं।
-
प्रशासन ने धारा का रुख मोड़कर बांध को बचाया।
-
विशेषज्ञ बोले — “यह अस्थायी समाधान है, स्थायी व्यवस्था जरूरी।”
https://youtube.com/shorts/vt3Z7y-yGk0?feature=share
ग्राउंड रिपोर्ट – अवनीश त्यागी, बिजनौर से
बिजनौर का गंगा बैराज इस समय गंभीर खतरे से जूझ रहा है। गंगा के तेज बहाव और लगातार हो रहे कटान ने बैराज की बाउंड्री को कमजोर कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि इरिगेशन विभाग को पहले से इसकी आशंका थी, मगर समय रहते पुख्ता कदम नहीं उठाए गए। यही वजह है कि बैराज अब संकट की स्थिति में है।
स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि यदि बंधा टूटता तो सैकड़ों घर और हजारों बीघा खेती डूब क्षेत्र में आ जाती। वहीं, सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा भी क्षति का शिकार हो सकता था।
एडीएम वान्या सिंह का बयान
अपर जिलाधिकारी श्रीमती वान्या सिंह ने स्थिति पर पूरी जानकारी दी। उन्होंने कहा:
👉 “बंधे की सुरक्षा को खतरे की सूचना मिलते ही हम सुबह से ही मौके पर मौजूद हैं। बाउंड्री की सुरक्षा पर पैनी नजर रखी जा रही है। हमने धारा का रुख मोड़ने में सफलता पाई है, जिससे फिलहाल बांध सुरक्षित नजर आ रहा है।”
उनके इस बयान ने ग्रामीणों में कुछ हद तक भरोसा जगाया है कि हालात प्रशासन की सीधी निगरानी में हैं।
संभावित खतरे (अगर बंधा टूटा तो)
-
बिजनौर शहर के कई हिस्सों व गांव डूब क्षेत्र में बदल जाएंगे — सैकड़ों परिवार प्रभावित होंगे।
-
खेती चौपट होगी — हजारों किसानों की फसलें बर्बाद हो सकती हैं।
-
सड़कें-पुल डैमेज होंगे — स्थानीय कनेक्टिविटी पूरी तरह बाधित हो सकती है।
-
आर्थिक नुकसान करोड़ों में — राहत और पुनर्वास पर बड़ा खर्च आएगा।
जनता और विशेषज्ञों की राय
- ग्रामीणों का आरोप: “हमने बार-बार विभाग को चेताया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।”
- किसानों की चिंता: “अगर बंधा टूटा तो हमारी मेहनत की पूरी फसल पानी में डूब जाएगी।”
- विशेषज्ञों की चेतावनी: “धारा मोड़ने से तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थायी समाधान के बिना खतरा दोबारा खड़ा होगा।”
- सामाजिक संगठनों की मांग: युद्धस्तर पर कटान रोकने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जरूरत।

प्रशासन की मौजूदा कार्रवाई
-
मौके पर प्रशासनिक अफसर और टीम तैनात।
-
धारा का रुख मोड़कर पानी का दबाव घटाया गया।
-
बंधे की बाउंड्री की सुरक्षा पर लगातार निगरानी।
-
संभावित आपदा से निपटने के लिए राहत-बचाव दल अलर्ट पर।
विश्लेषणात्मक नजरिया
- प्राकृतिक और मानवीय कारण दोनों जिम्मेदार: गंगा का तेज बहाव तो प्राकृतिक स्थिति है, लेकिन इरिगेशन विभाग की तैयारी में कमी मानवीय लापरवाही है।
- फिलहाल राहत, लेकिन खतरा बरकरार: एडीएम की सक्रियता से हालात काबू में हैं, मगर यह केवल अस्थायी उपाय है।
- स्थायी समाधान की मांग: विशेषज्ञ और ग्रामीण चाहते हैं कि बंधे को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक प्रोजेक्ट तुरंत शुरू किया जाए।
गंगा बैराज का संकट केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा भी है। एडीएम वान्या सिंह और प्रशासन ने धारा मोड़कर खतरे को तुरंत टाल दिया है, लेकिन जब तक बंधे की बाउंड्री को स्थायी रूप से मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक यह राहत अधूरी ही रहेगी।
👉 बड़ा सवाल यही है कि —
- क्या इरिगेशन विभाग अब जागेगा और स्थायी समाधान निकालेगा?
- या फिर बिजनौर को भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ेगा?











