ओबरा-अनपरा पावर प्रोजेक्ट पर सस्ती बिजली का सवाल
मध्य प्रदेश की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी ज्वॉइंट वेंचर समाप्त करने की मांग तेज
लखनऊ, 07 सितंबर 2025 | उत्तर प्रदेश में नई बिजली परियोजनाओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि ओबरा डी और अनपरा ई पावर प्रोजेक्ट को एनटीपीसी के साथ बनाए जा रहे ज्वॉइंट वेंचर से अलग कर सीधे राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए। समिति का दावा है कि ऐसा करने से 35 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती बिजली मिल सकती है।
मुख्य हाइलाइट्स
- मध्य प्रदेश की मिसाल: अमरकंटक बिजलीघर में ज्वॉइंट वेंचर समाप्त कर राज्य उत्पादन निगम को परियोजना सौंपी गई।
- उत्तर प्रदेश का मामला: ओबरा डी (2×800MW) और अनपरा ई (2×800MW) प्रोजेक्ट वर्तमान में एनटीपीसी के साथ JV में।
- लागत का सवाल: राज्य निगम को देने पर 35–40 पैसे प्रति यूनिट सस्ती बिजली संभव।
- तकनीकी दिक्कतें:
- कोयला आपूर्ति 500–700 KM दूर से → लागत बढ़ने का खतरा।
- एक ही ट्रैक पर कोयला अनलोडिंग से परिचालन बाधाएं।
- ऐश डिस्पोजल (राख प्रबंधन) गंभीर चुनौती।
- कानूनी और ऑपरेशनल विवाद: एक ही परिसर में दो स्वामित्व वाली इकाइयों से भविष्य में विवादों की आशंका।
- कर्मचारी समिति का अलर्ट: मध्य प्रदेश जैसी परिस्थितियां यूपी में भी, JV खत्म न करने पर राज्य को भारी नुकसान होगा।
मध्य प्रदेश से सबक
मध्य प्रदेश सरकार ने मार्च 2023 में अमरकंटक में 660 MW यूनिट ज्वॉइंट वेंचर (SECL-कोल इंडिया) के साथ लगाने का फैसला किया था। लेकिन कर्मचारी विरोध और तकनीकी दिक्कतों के चलते दो साल बाद कैबिनेट ने निर्णय बदल दिया और अब यह इकाई राज्य उत्पादन निगम लगाएगा।
यूपी में क्यों बढ़ रहा विवाद?
- राज्य कैबिनेट ने जुलाई 2023 में ओबरा डी और अनपरा ई प्रोजेक्ट JV में एनटीपीसी के साथ लगाने का निर्णय लिया था।
- देशभर में यह पहली बार था कि राज्य निगम की मौजूदा यूनिट्स के साथ JV को अनुमति दी गई।
- कर्मचारी संगठन का तर्क है कि:
- एक ही परिसर में JV और राज्य निगम की परियोजनाओं का सह-अस्तित्व असंगत और विवादास्पद होगा।
- कोयला व ऐश प्रबंधन की समस्याओं से उत्पादन लागत और परिचालन जोखिम दोनों बढ़ेंगे।
संघर्ष समिति की चेतावनी
संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा—
“मध्य प्रदेश सरकार ने ढाई साल बाद जो निर्णय लिया, वही परिस्थितियां उत्तर प्रदेश में भी हैं। अगर ओबरा और अनपरा में JV निरस्त कर राज्य निगम को परियोजना नहीं दी गई तो प्रदेश को महंगी बिजली और भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।”
उत्तर प्रदेश सरकार के सामने अब बड़ा सवाल है—
क्या वह मध्य प्रदेश की राह पर चलते हुए ज्वॉइंट वेंचर समाप्त कर सीधे राज्य निगम को यह परियोजनाएं सौंपेगी, या फिर मौजूदा फैसले पर अडिग रहकर महंगी बिजली और परिचालन दिक्कतों का जोखिम उठाएगी?
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