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“गुरु का धर्म और मां की सीख: बिना मेहनत सफलता संभव नहीं”

“गुरु का धर्म और मां की सीख: बिना मेहनत सफलता संभव नहीं”
शिक्षक दिवस के इस विशेष अवसर पर मैं अपनी मां को याद कर रही हूँ, जो स्वयं एक अध्यापिका थीं। भले ही आज वे इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी दी हुई सीख मेरे जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।

मैं छठवीं कक्षा में पढ़ती थी, तब पढ़ाई में मेरा बिल्कुल मन नहीं लगता था। चूँकि मेरी मां मेरे ही स्कूल में अध्यापिका थीं, इसलिए मेरे मन में यह गलत धारणा बैठ गई कि मुझे मेहनत करने की कोई जरूरत नहीं है—मां तो मुझे पास कर ही देंगी। मैंने पूरा साल खेलकूद में गंवा दिया और जब परीक्षा हुई, तो मैं फेल हो गई।

नतीजा देखकर मैंने नाराज़ होकर मां से कहा—
“आप चाहतीं तो मुझे पास कर सकती थीं, फिर क्यों फेल कर दिया?”

मां मुस्कराईं और प्यार से बोलीं—
“यदि मैं तुम्हें मेहनत किए बिना पास कर दूं, तो यह उन बच्चों के साथ अन्याय होगा जो दिन-रात मेहनत करते हैं। एक अध्यापक का धर्म है कि वह हर छात्र को उसकी मेहनत के हिसाब से ही अंक दे। अगर मैं तुम्हें बिना पढ़ाई पास कर दूं, तो तुम्हारा कभी मेहनत करने का मन ही नहीं करेगा।”

मित्रों, मां की यह सीख मेरे जीवन का सबसे बड़ा turning point बन गई। मैंने उसी दिन ठान लिया कि आगे जीवन में हर सफलता मेहनत के बल पर ही हासिल करनी है।

आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो लगता है कि सच्चा शिक्षक वही है, जो अपने कर्तव्य और उसूलों से कभी समझौता न करे—चाहे उसके सामने अपना ही बच्चा क्यों न हो।

इसलिए आज शिक्षक दिवस पर मैं पूरे मन से कहना चाहती हूँ—
“गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, वे जीवन की दिशा दिखाते हैं। और मेहनत ही वह कुंजी है, जो हर सफलता का दरवाजा खोलती है।”

धन्यवाद!
– सुशी सक्सेना

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