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रेड-कार्पेट से रामलला तक: भूटान के पीएम का अयोध्या दौरा बना चर्चा का विषय

भूटान के पीएम दशो टोबगे का अयोध्या आगमन: रामलला के किए दर्शन, एयरपोर्ट पर रेड-कार्पेट स्वागत

अयोध्या में गूंजा भूटान-भारत मित्रता का स्वर: प्रधानमंत्री टोबगे ने श्रीराम जन्मभूमि में टेका माथा 

श्रीरामलला के दर्शन के लिए पहुंचे उच्चस्तरीय मेहमान, एयरपोर्ट पर हुआ रेड-कार्पेट स्वागत

अयोध्या एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत

भूटान के प्रधानमंत्री दशो टशेरिंग टोबगे शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। महार्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों ने रेड-कार्पेट बिछाकर मेहमान नेता का अभिनंदन किया। पारंपरिक तरीके से स्वागत के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही।

रामलला के दर्शन का विशेष कार्यक्रम

टोबगे का अयोध्या प्रवास लगभग तीन घंटे का तय है। इस दौरान वे सीधे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे और रामलला के दर्शन-पूजन किए। स्थानीय प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने विशेष व्यवस्था की थी ताकि प्रधानमंत्री का दर्शन कार्यक्रम सुचारु और गरिमामय तरीके से संपन्न हो सके।

सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियाँ

प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने पहले ही रामजन्मभूमि परिसर तथा अन्य स्थानों का निरीक्षण किया था।

मंदिर परिसर में सुरक्षा की कई परतें लगाई गईं।

एयरपोर्ट से लेकर मंदिर तक ट्रैफिक रूट डायवर्ट किया गया।

स्थानीय अधिकारियों और स्वयंसेवकों को भी जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं।

भारत-भूटान संबंधों का सांस्कृतिक आयाम

टोबगे का यह दौरा केवल धार्मिक महत्व ही नहीं बल्कि भारत-भूटान की पारंपरिक मित्रता और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी प्रतीक है।

अयोध्या में दर्शन को “सॉफ्ट डिप्लोमेसी” का हिस्सा माना जा रहा है।

इससे दोनों देशों के बीच धार्मिक-सांस्कृतिक रिश्ते और मजबूत होंगे।

यात्रा यह संदेश देती है कि भारत और भूटान के रिश्ते केवल रणनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं से भी जुड़े हुए हैं।

आगे का कार्यक्रम

अयोध्या से प्रधानमंत्री टोबगे दोपहर बाद दिल्ली के लिए रवाना हो गए। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, उनकी भारत यात्रा (3 से 6 सितंबर) में गया, राजगीर और दिल्ली के अन्य कार्यक्रम भी शामिल हैं।

लोकरुचिकर पहलू

रेड-कार्पेट और पारंपरिक स्वागत ने अयोध्या के नागरिकों में उत्साह भर दिया।

स्थानीय लोगों में यह चर्चा का विषय रहा कि भूटान जैसे मित्र देश के प्रधानमंत्री सीधे रामलला के दर्शन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इससे अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान मिलने की संभावना है।

 यह यात्रा न केवल कूटनीति और धर्म का संगम है, बल्कि उत्तर प्रदेश विशेषकर अयोध्या की पहचान को विश्व पटल पर और अधिक प्रखर करने का अवसर भी है।

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