Target Tv Live

दो छात्रों की मौत से गांव में मातम, परिजनों ने पोस्टमार्टम से किया इंकार

             बिजनौर ट्रेन हादसा:

दो छात्रों की मौत से गांव में मातम, परिजनों ने पोस्टमार्टम से किया इंकार
 पढ़ाई के सपने अधूरे रह गए, ग़मगीन परिजनों ने कहा, “हमारे बच्चों की लाश को और मत छुओ”
 हादसे की बड़ी बातें
  • स्थान: ग्राम मोहड़ा, धामपुर क्षेत्र, जनपद बिजनौर
  • मृतक: 19 वर्षीय भूदेव सिंह (पुत्र शिवम कुमार) और सुनील कुमार (पुत्र गोलू उर्फ प्रिंस)
  • घटना: रेलवे ट्रैक पार करते समय तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर मौत
  • पुलिस कार्रवाई: आरपीएफ धामपुर और कोतवाली थाना पुलिस बल ने घटनास्थल पर पहुँचकर जांच की
  • परिवार का फैसला: परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इंकार किया
  • गांव का माहौल: पूरे गांव में कोहराम, हर आंख नम

 कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार की शाम दोनों छात्र अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही वे रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे, अचानक ट्रेन आ गई। छात्रों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और दोनों पटरियों पर ही मौत के शिकार हो गए।

 सपनों का सफर बीच में टूटा

भूदेव और सुनील, दोनों बीएससी के छात्र थे और परिवार की उम्मीदों का सहारा। पढ़ाई पूरी कर बेहतर भविष्य बनाने का सपना अधूरा रह गया। अब उनकी मौत ने गांव ही नहीं बल्कि पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है।

 पुलिस और प्रशासन की भूमिका

हादसे की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी धामपुर, आरपीएफ धामपुर और स्थानीय पुलिस बल घटनास्थल पर पहुँचे। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने की औपचारिकता पूरी करनी चाही, लेकिन परिजनों ने ग़मगीन माहौल में इसकी अनुमति नहीं दी।

 बड़ा सवाल: आखिर क्यों बार-बार रेलवे ट्रैक बन रहा मौत का जाल?

  • रेलवे ट्रैक पर अवैध कटिंग और बिना फाटक वाले स्थान अक्सर हादसों की वजह बनते हैं।
  • लोगों को जल्दबाजी में ट्रैक पार करने की आदत घातक साबित हो रही है।
  • रेलवे और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा प्रावधानों की कमी भी सवालों के घेरे में है।
  • ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक के किनारे चेतावनी बोर्ड और अवरोधक लगाए जाने चाहिए थे।

 लोगों की मांग

गांव के लोगों ने हादसे के बाद आक्रोश व्यक्त किया। उनका कहना है कि:

  • रेलवे प्रशासन को सुरक्षा उपाय बढ़ाने चाहिए
  • ट्रैक पर चेतावनी संकेत और बैरिकेड्स लगने चाहिए
  • प्रशासन को स्थानीय जागरूकता अभियान चलाना चाहिए ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों

बिजनौर का यह हादसा सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की त्रासदी है। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा इंतज़ाम आखिर कब तक नज़रअंदाज़ किए जाते रहेंगे? जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक मासूम जिंदगियां इस तरह हादसों का शिकार होती रहेंगी।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें