विश्व उद्यमिता दिवस
“नौकरी नहीं, स्वावलंबन बने जीवन का लक्ष्य” , सम्मेलन में युवाओं को मिला नया मंत्र

सम्मेलन का परिदृश्य
विश्व उद्यमिता दिवस के अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच ने बिजनौर के विवेक विश्वविद्यालय में “स्वदेशी एवं उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन” का आयोजन किया।
इस सम्मेलन का उद्देश्य था –
- युवाओं को आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करना
- स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग को बढ़ावा देना
- सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर युवा उद्यमिता को प्रोत्साहन देना
सम्मेलन में छात्रों, शिक्षकों, महिला उद्यमियों और उद्योग विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति इसे ऐतिहासिक बना गई।
मंच से निकले प्रेरणादायी विचार
🔹 प्रशान्त महर्षि (प्रांत सह संयोजक, स्वदेशी जागरण मंच)
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा:
- “यह समय है स्वदेशी अपनाने का। विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था को कमजोर करती है।”
- “युवा वर्ग अगर स्वदेशी अपनाएगा तो यह न सिर्फ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम होगा बल्कि रोजगार सृजन का मार्ग भी बनेगा।”
🔹 श्रीमती ऋतुरानी (SDM सदर, बिजनौर – मुख्य अतिथि)
- अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि “जीवन में संघर्ष का कोई विकल्प नहीं है। छोटी-छोटी नौकरियों के पीछे भागने से बेहतर है कि युवा स्वरोजगार शुरू करें और दूसरों को भी रोजगार दें।”
- उन्होंने युवाओं को यह भी प्रेरित किया कि राष्ट्र और समाज की स्थिति को समझकर हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
🔹 अमित कुमार (उपायुक्त, उद्योग विभाग, बिजनौर)
- उन्होंने युवाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं से अवगत कराया।
- विशेषकर “मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना” पर विस्तार से जानकारी दी और बताया कि इससे हजारों युवाओं को लाभ हुआ है।
महिला उद्यमियों का सम्मान, करना हमारा‘विदुर ब्रांड’ की सफलता
इस सम्मेलन की सबसे खास बात रही – NRLM (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के अंतर्गत “विदुर ब्रांड” से जुड़ी प्रथम पीढ़ी की महिला उद्यमियों का सम्मान।
ये महिलाएं अपने-अपने उत्पादों के माध्यम से गांव से लेकर बाजार तक नई पहचान बना रही हैं।
- वीपिन देवी – स्कूटी सेवा
- जुली – साबुन निर्माण
- रेनू – मिर्च-मसाले
- बाला – सरसों का तेल
- मनोज देवी – पशु आहार
- निशा – मिलेट्स आटा
- मिथलेश – सैनिटरी पैड
- ज्योति – आटा उत्पादन
➡️ इन महिलाओं को सम्मानित करके न सिर्फ महिला सशक्तिकरण को बल मिला बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को भी सराहा गया।
विश्वविद्यालय और आयोजकों की अहम भूमिका
- विवेक विश्वविद्यालय के VC प्रो. डॉ. नरेश कुमार गुप्ता ने नई शिक्षा नीति (NEP) का उल्लेख करते हुए कहा कि अब हर पाठ्यक्रम में कौशल विकास (Skill Development) को अनिवार्य रूप से जोड़ा जा रहा है।
- उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी पाना नहीं, बल्कि उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना होना चाहिए।
- कार्यक्रम का संचालन राजेश अरोड़ा (सह-समन्वयक, स्वाबलंबी भारत अभियान) ने किया, जबकि मंच पर स्वदेशी जागरण मंच और लघु उद्योग भारती के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
स्वदेशी का संकल्प,भविष्य की दिशा
सम्मेलन का समापन स्वदेशी वस्तुओं के पत्रक वितरण और “स्वदेशी अपनाने” की शपथ के साथ हुआ।
➡️ घोषणा की गई कि अब से जनपद के हर विद्यालय में ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित होंगे, ताकि बच्चों और युवाओं को शुरू से ही स्वदेशी और उद्यमिता की शिक्षा मिल सके।
विश्लेषण: क्यों अहम है यह सम्मेलन?
युवाओं के लिए नया विजन
- पहले जहां छात्र नौकरी के पीछे भागते थे, वहीं अब उन्हें स्वावलंबन और स्टार्टअप्स की ओर प्रेरित किया जा रहा है।
महिला शक्ति का उदय
- ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं, जो पहले घरेलू दायरे तक सीमित थीं, अब अपने उत्पादों से स्थानीय ब्रांड खड़ा कर रही हैं।
- यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।
सरकार की योजनाओं का लाभ
- कार्यक्रम में युवाओं को प्रत्यक्ष रूप से बताया गया कि योजनाओं का लाभ कैसे उठाएं।
- यह कदम युवा और सरकार के बीच की दूरी कम करता है।
स्वदेशी बनाम विदेशी बहस को नई ऊर्जा
- यह सम्मेलन उस विचारधारा को मजबूत करता है कि स्वदेशी सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य है।
बिजनौर का यह सम्मेलन युवाओं, महिलाओं और समाज को एक नई दिशा देने वाला प्रयास साबित हुआ।
विश्व उद्यमिता दिवस पर दिया गया संदेश साफ है:
👉 “राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है तो युवाओं को नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनना होगा।”
👉 “स्वदेशी को अपनाना ही भारत को आत्मनिर्भर बनाने की असली कुंजी है।”











