Target Tv Live

बासमती चावल में 12 कीटनाशक प्रतिबंधित, बिजनौर समेत 30 जिलों में आदेश लागू

बासमती चावल में 12 कीटनाशक प्रतिबंधित, बिजनौर समेत 30 जिलों में आदेश लागू

निर्यात बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम

किसान और विक्रेता सावधान! इन दवाओं की बिक्री और प्रयोग पर सख्त रोक

बिजनौर, 21 अगस्त 2025।
उत्तर प्रदेश शासन ने बासमती चावल की अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। शासन ने अधिसूचना जारी कर बिजनौर समेत 30 जिलों में 12 प्रमुख कीटनाशकों की बिक्री, वितरण और प्रयोग पर 60 दिनों के लिए रोक लगा दी है। यह आदेश 1 अगस्त 2025 से प्रभावी है और इसका उद्देश्य बासमती चावल की गुणवत्ता सुधारकर निर्यात को बढ़ावा देना है।

 आदेश की कानूनी पृष्ठभूमि

जिला कृषि रक्षा अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने जानकारी दी कि यह आदेश कीटनाशक अधिनियम 1968 (अधिनियम संख्या 46, धारा 27(1)) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों के तहत लागू किया गया है। राज्यपाल महोदया ने इस पर अपनी स्वीकृति दी है और इसके तहत प्रदेशभर में कृषि विभाग को सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

 किन कीटनाशकों पर लगी रोक?

प्रतिबंधित कीटनाशकों में शामिल हैं:

  • ट्राइसाइक्लाजोल
  • बुप्रोफेजिन
  • एसीफेट
  • क्लोरपाइरीफॉस
  • टेबुकोनोजोल
  • प्रोपिकोनाजोल
  • थायोगेथाक्साग
  • प्रोफेनोफॉस
  • इमिडाक्लोप्रिड
  • कार्वेण्डाजिम
  • कार्बोपयूरान

👉 इन सभी के किसी भी प्रकार के फॉर्मूलेशन का बिक्री, वितरण और प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।

 कृषि विभाग की सख्त चेतावनी

  • कृषि विभाग ने सभी कीटनाशी विक्रेताओं को SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) के जरिए निर्देशित किया है कि वे इन कीटनाशकों की बिक्री बासमती धान के लिए न करें।
  • यदि कोई विक्रेता आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कीटनाशक अधिनियम 1968 के अंतर्गत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
  • किसानों से भी अपील की गई है कि वे इन प्रतिबंधित कीटनाशकों का उपयोग बंद करें और वैकल्पिक उपायों का सहारा लें।

 किसानों और निर्यातकों पर प्रभाव

किसानों पर असर

  • अब किसानों को बासमती धान की फसल में सुरक्षित और अनुशंसित कीटनाशकों या जैविक उपायों का उपयोग करना होगा।
  • शुरुआती दिनों में किसानों को थोड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे उन्हें फायदा ही होगा क्योंकि उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा।

निर्यातकों पर असर

  • बासमती चावल के निर्यात में गुणवत्ता सुधार से विदेशी खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा।
  • यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों के बाजारों में उत्तर प्रदेश के बासमती की मांग और अधिक होगी।
  • इससे प्रदेश के किसानों को बेहतर दाम और निर्यातकों को अधिक लाभ मिलेगा।

 क्यों ज़रूरी था यह कदम?

  • पिछले वर्षों में कई बार विदेशी बाजारों से भारतीय बासमती चावल की खेप लौटा दी गई थी क्योंकि उसमें प्रतिबंधित कीटनाशकों के अवशेष पाए गए।
  • इससे भारत की छवि और निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ा।
  • उत्तर प्रदेश, विशेषकर बिजनौर क्षेत्र, बासमती उत्पादन का बड़ा केंद्र है। यहां की फसलें अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरें, इसके लिए यह कदम अनिवार्य हो गया था।

 किसानों के लिए सुझाए गए वैकल्पिक उपाय

  • जैविक कीटनाशक और नीम आधारित उत्पाद
  • ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक एजेंट
  • फसल चक्र और खेत की स्वच्छता
  • समेकित कीट प्रबंधन (IPM) तकनीक

इन उपायों से किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और साथ ही निर्यात मानकों का पालन भी सुनिश्चित कर सकते हैं।

सरकार का यह निर्णय केवल एक प्रतिबंधात्मक आदेश नहीं है, बल्कि यह भारत के बासमती ब्रांड को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में रणनीतिक कदम है। यदि किसान और विक्रेता नियमों का पालन करेंगे, तो इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

 

Leave a Comment

यह भी पढ़ें