“सिर्फ़ गन्ना नहीं, अब स्वास्थ्य-सड़क-तटबंध पर भी भाकियू की आवाज़ बुलंद”
बिजनौर। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की मासिक पंचायत मंगलवार को गन्ना समिति, बिजनौर में आयोजित हुई। पंचायत की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान ने की और संचालन विजय पहलवान ने किया। बैठक में जिले के विभिन्न हिस्सों से आए किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। पंचायत में किसानों ने न केवल कृषि से जुड़ी समस्याएँ बल्कि बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य सेवाओं और प्राकृतिक आपदा से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए।
किसानों ने पंचायत के अंत में तीन ज्ञापन जिलाधिकारी बिजनौर को सौंपे, जिनमें अनेक जनहित से जुड़े मुद्दे सम्मिलित रहे।
बाढ़ पीड़ितों का दर्द और तटबंध निर्माण की मांग
पंचायत में सबसे बड़ा मुद्दा बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का रहा। किसानों ने कहा कि जलीलपुर व अफजलगढ़ इलाके में रामगंगा नदी की बाढ़ से हर साल फसलों और मकानों को भारी नुकसान होता है।
- बाढ़ प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से राशन व बच्चों के लिए वाहन सुविधा दी जाए।
- मकानों और फसलों के नुकसान का त्वरित सर्वे कर मुआवज़ा दिलाया जाए।
साथ ही, चांदपुर विधानसभा क्षेत्र के जहानाबाद से नारनौल तक गंगा तटबंध निर्माण की मांग को किसानों ने मजबूती से उठाया। उनका कहना था कि हर साल बाढ़ के पानी से खेत और घर तबाह हो जाते हैं, जिससे किसानों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है।
सड़कें और पुलिया बनी मुसीबत
किसानों ने बुनियादी ढांचे की बदहाली पर भी चिंता जताई।
- चांदपुर-बासटा मार्ग पर जगह-जगह गड्ढों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। इस सड़क को तुरंत दुरुस्त कराने की मांग की गई।
- बिजनौर-नगीना रोड पर शादीपुर बरूकी स्थित एमपीएस स्कूल के पास पुलिया टूटी हुई है। इस वजह से बरसाती पानी खेतों में भर गया और 100 बीघा से अधिक फसल जलमग्न हो गई। किसानों ने पुलिया की मरम्मत को जरूरी बताया।
अधूरा मुआवज़ा, अधूरी न्याय की आस
अफजलगढ़ क्षेत्र की पिलीढेम परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवज़ा अब तक कई किसानों को नहीं मिला है। पंचायत में उपस्थित किसानों ने दो टूक कहा कि जिन किसानों को मुआवज़ा नहीं मिला है उन्हें “जमीन के बदले जमीन” दी जानी चाहिए।
ग्राम समाज की भूमि पर अतिक्रमण
मोहम्मदपुर देवमल क्षेत्र के गुजरपुर जसपाल और ढोकलपुर के बीच ग्राम समाज की जमीन पर झुग्गियां पड़ी हैं। किसानों ने बताया कि इनसे गंदगी और बीमारी फैल रही है। पंचायत ने प्रशासन से इन झुग्गियों को तत्काल हटाने की मांग की।
थैलेसीमिया मरीजों के लिए उठी आवाज़
पंचायत ने सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों को भी आवाज़ दी। किसानों ने कहा कि जिले में थैलेसीमिया नामक गंभीर बीमारी के मरीजों को हर महीने खून चढ़ाना पड़ता है, लेकिन जिला अस्पताल में कोई संतोषजनक सुविधा नहीं है।
किसानों ने डीएम से निम्नलिखित मांगें रखीं:
- थैलेसीमिया मरीजों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था।
- निको फिल्टर मशीन उपलब्ध कराई जाए।
- मरीजों को 100% दिव्यांग प्रमाणपत्र दिया जाए।
- आवश्यक दवाइयाँ निशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
- निजी ब्लड बैंकों से मुफ़्त ब्लड उपलब्ध कराया जाए।
- निजी ब्लड बैंक से लाए गए खून को मरीजों को चढ़ाने की अनुमति दी जाए।
विश्लेषण
भाकियू की यह पंचायत सिर्फ गन्ने के भुगतान या कृषि तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें जनजीवन के हर पहलू को शामिल किया गया।
- बाढ़ और तटबंध निर्माण किसानों के अस्तित्व और सुरक्षा से जुड़े हैं।
- सड़क और पुलिया सुधार सीधे किसानों की आजीविका और परिवहन व्यवस्था से जुड़ा है।
- वहीं, थैलेसीमिया मरीजों के लिए आवाज़ उठाकर भाकियू ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।
यह साफ है कि किसान संगठन अब एक समग्र सामाजिक और जनहितकारी भूमिका निभा रहा है।
भाकियू की मासिक पंचायत में उठी मांगें किसानों की जमीनी हकीकत को सामने रखती हैं। किसानों ने साफ संदेश दिया है कि उनकी लड़ाई केवल गन्ने की कीमत तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस मुद्दे पर है जो ग्रामीण जनता के जीवन को प्रभावित करता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन मांगों पर कितना गंभीरता से कार्रवाई करता है।












