“यूपी में बिजली निजीकरण पर बवाल! कर्मचारी बोले– टेण्डर हुआ तो अंधेरे में डूब जाएगा प्रदेश”
“अनिश्चितकालीन हड़ताल और जेल भरो आंदोलन की तैयारी, बिजली कर्मियों का सरकार को अल्टीमेटम”
कार्य बहिष्कार और जेल भरो आंदोलन की तैयारी, संघर्ष समिति ने नियामक आयोग को लिखा पत्र
लखनऊ से बड़ी खबर
उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण का मुद्दा गरमा गया है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने साफ चेतावनी दी है कि अगर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर जारी हुआ, तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और जेल भरो आंदोलन छेड़ देंगे।
संघर्ष समिति की मुख्य मांगें और चेतावनियां
- आयोग को पत्र: RFP डॉक्यूमेंट पर फैसला लेने से पहले समिति से वार्ता हो।
- एलर्ट जारी: टेण्डर हुआ तो पूरा प्रदेश अंधेरे में, कर्मचारी करेंगे कार्य बहिष्कार।
- भविष्य संकट में: निजीकरण के बाद 50,000 संविदा कर्मियों की छटनी और 16,500 नियमित कर्मचारियों की नौकरी खतरे में।
- पदोन्नति रुकेगी, पदावनति बढ़ेगी – अभियंता और जूनियर इंजीनियर सबसे ज्यादा प्रभावित।
- आरोप: निजीकरण का डॉक्यूमेंट कुछ निजी घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार।
- मांग: पूर्व निदेशक वित्त निधि नारंग द्वारा तैयार दस्तावेज को तुरंत निरस्त किया जाए।
लखनऊ बैठक से निकला ऐलान
केंद्रीय पदाधिकारियों ने बैठक में कहा कि सरकार जबरन निजीकरण लागू कर रही है।
संघर्ष समिति ने बिजली कर्मियों को आगाह किया –
👉 “टेण्डर जारी हुआ तो पूरे प्रदेश में हड़ताल और जेल भरो आंदोलन होगा।”
क्यों गहराया विवाद?
- सरकार कहती है कि निजीकरण से कार्यक्षमता बढ़ेगी और घाटा कम होगा।
- लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि इससे नौकरियां खत्म होंगी, उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा।
- समिति का दावा – यह प्रक्रिया पूरी तरह जनविरोधी और कर्मचारी विरोधी है।
मैदान में संघर्ष की तैयारी
प्रदेश भर में बिजली कर्मचारी पहले से ही विरोध जता रहे हैं।
अब समिति ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और आक्रामक रूप ले सकता है।
उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण का मामला अब सरकार बनाम कर्मचारी टकराव में बदल चुका है। अगर टेण्डर जारी हुआ तो प्रदेश में बिजली संकट और आंदोलन दोनों देखने को मिल सकते हैं।













