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यूपी में बिजली संग्राम: तिरंगे के साथ सड़कों पर उतरेंगे बिजली कर्मी, निजीकरण को खुली चुनौती!

 यूपी में बिजली संग्राम: तिरंगे के साथ सड़कों पर उतरेंगे बिजली कर्मी, निजीकरण को खुली चुनौती!

लखनऊ | 13 अगस्त 2025

 बड़ी बातें एक नज़र में

  • विकसित यूपी के लिए पावर सेक्टर सरकारी ही रहना चाहिए” — विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का दो-टूक।
  • योगी सरकार में 8 साल में बिजली व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार, AT&C हानि 42% से घटकर 15% (राष्ट्रीय मानक)।
  • फिर भी निजीकरण क्यों? — कर्मचारियों का सवाल, आरोप– निजीकरण के पीछे ‘मेगा स्कैम’ और अफसर–कारपोरेट गठजोड़
  • मई 2025 में यूपी ने देश में सबसे ज्यादा बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड तोड़ा, महाराष्ट्र को पछाड़ा।
  • 3.63 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ यूपी का देश का सबसे बड़ा बिजली उपभोक्ता नेटवर्क
  • पूर्वांचल-बुंदेलखंड की गरीब जनता पर निजीकरण थोपना अन्याय — सस्ती बिजली सिर्फ सरकारी नियंत्रण में संभव
  • संघर्ष समिति का ऐलान — 14 अगस्त को सभी जिलों और परियोजनाओं में तिरंगा रैली और निजीकरण विरोधी सभाएं।
  • लखनऊ में शाम 4 बजे हाइडिल फील्ड हॉस्टल में बड़ी सभा, 259वें दिन भी आंदोलन जारी

 पृष्ठभूमि और पेंच
यह लड़ाई सिर्फ वेतन या नौकरी बचाने की नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आम जनता की जेब पर असर की है। कर्मचारी मानते हैं कि अगर पावर सेक्टर निजी हाथों में गया तो गरीब इलाकों में बिजली महंगी हो जाएगी और सप्लाई की स्थिरता पर असर पड़ेगा। आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष अफसरों ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन बनाकर कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने की तैयारी की है।

 क्यों यह खबर जरूरी है?

  • यह मुद्दा विकसित भारत-विकसित यूपी 2047 के विजन से सीधे जुड़ा है।
  • पावर सेक्टर की नीतियों पर कर्मचारियों और सरकार के बीच सीधी टकराहट।
  • यूपी के ग्रामीण, गरीब और किसान वर्ग की बिजली की कीमत और उपलब्धता का भविष्य दांव पर।

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