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“बिजनौर में पहाड़ा नदी का कहर: बैल-बुग्गी पलटी, बाइक समेत 5 लोग धारा में बहे, ग्रामीणों ने बचाई जान”

“बिजनौर में पहाड़ा नदी का कहर: बैल-बुग्गी पलटी, बाइक समेत 5 लोग धारा में बहे, ग्रामीणों ने बचाई जान”

बिजनौर, बढ़ापुर (10 अगस्त 2025) पहाड़ा नदी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उसका बहाव मज़ाक नहीं है। रविवार को बढ़ापुर क्षेत्र के सरदारपुर छायनी के पास एक बैल-बुग्गी पर सवार पाँच लोग और दो मोटरसाइकिलें नदी पार कर रहे थे, लेकिन बीच धारा में ही बुग्गी असंतुलित होकर पलट गई।

गनीमत रही कि आसपास मौजूद ग्रामीणों की सूझबूझ और फुर्ती ने पाँच ज़िंदगियाँ बचा लीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, और लोगों में चर्चा का विषय बन गया है।

घटना के मुख्य बिंदु

  • स्थान: पहाड़ा नदी, सरदारपुर छायनी (बढ़ापुर क्षेत्र, नगीना तहसील)
  • वाहन: बैल-बुग्गी, जिस पर 5 लोग + 2 मोटरसाइकिलें लदी थीं
  • समय: रविवार सुबह (10 अगस्त 2025)
  • घटना: बुग्गी नदी के बीच पलटी, सभी सवार पानी में गिरे
  • बचाव: स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत नदी में छलांग लगाकर बचाया
  • नतीजा: सभी लोग सुरक्षित, बड़ा हादसा टल गया

वायरल वीडियो का असर

  • वीडियो में साफ़ दिखता है कि बैल-बुग्गी धीरे-धीरे पानी में उतरती है, लेकिन गहराई और तेज़ बहाव में संतुलन बिगड़ जाता है।
  • बुग्गी पलटते ही पानी में छप-छप करती चीखें और गांव वालों की दौड़ एकदम फिल्मी दृश्य जैसा बन जाती हैं।
  • कुछ ही सेकंड में 3-4 लोग नदी में कूदते हैं और एक-एक को खींचकर किनारे लाते हैं
  • सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन को चेतावनी दे रहे हैं कि “नदी पार करने के लिए पुल या नाव की व्यवस्था हो”

खतरे क्यों बढ़ते हैं?

  • बारिश के बाद पानी का तेज़ बहाव – बैल और बुग्गी का संतुलन बिगाड़ देता है।
  • बेतरतीब नदी पार करने की आदत – ग्रामीण अक्सर शॉर्टकट के लिए ऐसे रास्ते चुनते हैं।
  • सुरक्षा इंतज़ाम का अभाव – पुल या स्थायी नाव की सुविधा न होना।

स्थानीय आवाज़ें

  • एक चश्मदीद: “बस दो मिनट की देरी होती, तो शायद पाँचों को नहीं बचा पाते।”

  • गांव के बुज़ुर्ग: “पहाड़ा नदी के इस मोड़ पर कई हादसे हो चुके हैं, सरकार को कुछ करना चाहिए।”

           सबक और समाधान

  • पुल निर्माण की मांग – ग्रामीणों को सुरक्षित पार के लिए स्थायी संरचना चाहिए।
  • प्रशासन की जिम्मेदारी – मानसून में नदी पार करने पर अस्थायी रोक या चेतावनी बोर्ड लगाना ज़रूरी।
  • जनजागरूकता – ग्रामीणों को सिखाया जाए कि तेज़ बहाव में पशु-गाड़ी और बाइक लेकर पार करना खतरनाक है।

निचोड़:
आज तो किस्मत और गांववालों की फुर्ती ने पाँच जिंदगियाँ बचा लीं, लेकिन अगर प्रशासन और जनता मिलकर व्यवस्था नहीं करेंगे, तो अगली बार यह खबर सिर्फ “हादसे” की नहीं, “शोक” की हो सकती है।

 

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