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बिजनौर में बाढ़ का कहर, 42 गांव जलमग्न, 11 हज़ार से अधिक लोग प्रभावित

बिजनौर में बाढ़ का कहर, 42 गांव जलमग्न, 11 हज़ार से अधिक लोग प्रभावित

                                राहत मोर्चे पर प्रशासन सक्रिय

बिजनौर, 8 अगस्त 2025।   गंगा और खो नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच बिजनौर में बाढ़ की मार झेल रहे परिवारों के लिए राहत कार्य तेज़ कर दिए गए हैं। जिलाधिकारी श्रीमती कौर के अनुसार, 42 गांवों में 2,500 परिवारों के 11,342 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, और जिला प्रशासन “युद्धस्तर” पर बचाव व राहत के काम में जुटा है।

 बाढ़ का सबसे ज़्यादा असर कहां?

  • तहसील सदर – 10 गांव जलभराव से जूझ रहे हैं

  • तहसील चांदपुर – 10 गांव बुरी तरह प्रभावित

  • तहसील धामपुर – 22 गांवों में घरों में पानी घुसा, खेतों में फसलें डूबीं

 राहत शिविर और रसोई

  • 2 प्रमुख राहत शिविर:
    • ग्राम घासी वाला (तहसील बिजनौर)
    • ग्राम खानपुर खादर (तहसील चांदपुर)
  • गांवों में राहत रसोई:
    • इटावा, घासी वाला, रावली, ब्रह्मपुरी (बिजनौर)
    • खानपुर खादर (चांदपुर)
  • ताज़ा भोजन की व्यवस्था — पीड़ितों को सुबह-शाम पका हुआ भोजन दिया जा रहा है

 खाद्यान्न वितरण का आंकड़ा

आज 1,070 खाद्यान्न किट बांटी गईं:

  • बिजनौर – 425 किट
  • नजीबाबाद – 100 किट
  • चांदपुर – 470 किट
  • धामपुर – 100 किट

 नदी का हाल

  • गंगा – खतरे के निशान से 80 सेमी नीचे (जलस्तर 219.20 मी / डिस्चार्ज 1,29,737 क्यूसेक)
  • खो नदी – खतरे के निशान से 100 सेमी नीचे (जलस्तर 224.25 मी / डिस्चार्ज 7,753 क्यूसेक)

 राहत बलों की तैनाती

  • धामपुर – PAC की 1 बटालियन
  • चांदपुर – PAC और SDRF की 1-1 बटालियन
  • बिजनौर – NDRF की 1 बटालियन
    (नौकाएं, लाइफ जैकेट, रस्सियां और प्राथमिक चिकित्सा किट तैयार रखी गई हैं)
स्वास्थ्य सेवाएं बाढ़ पीड़ितों के दरवाजे पर
  • धामपुर – 19 मेडिकल कैंप
  • चांदपुर – 14
  • बिजनौर व नजीबाबाद – 10-10
  • नगीना – 8
    (इन कैंपों में बुखार, जलजनित रोग और त्वचा संक्रमण का इलाज प्राथमिकता से किया जा रहा है।
राहत के मोर्चे पर प्रशासन का दावा बनाम चुनौती

बिजनौर में प्रशासन की ओर से राहत का पहिया तेज़ी से घूम रहा है — भोजन, किट, मेडिकल कैंप और सुरक्षा बल तैनात हैं। फिलहाल गंगा और खो नदी का जलस्तर खतरे से नीचे है, लेकिन बारिश और अपस्ट्रीम जल छोड़ने पर हालात तेजी से बदल सकते हैं।
सबसे बड़ी चुनौती होगी दीर्घकालिक पुनर्वास, क्योंकि फसलें डूबने और रोज़गार ठप होने से प्रभावित परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराएगा।

 

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