बांकपुर में भाकियू का गुस्सा – फुटा किसानों का गुस्सा, गुलदार का आतंक और आर्थिक संकट

10 अगस्त 2025 | रिपोर्ट – Targettvlive.com
बिजनौर। बांकपुर रविवार को किसानों की आवाज़ का केंद्र बन गया, जब भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की पंचायत में जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान ने मंच से किसानों की मुश्किलों की पूरी “चार्जशीट” पढ़ दी। चौधरी मुन्ना सिंह और मास्टर मुनेश कुमार के संचालन में हुई इस पंचायत में माहौल गंभीर भी था और आक्रोश से भरा भी।
“किसान बना विभागों का शिकार”, सुनील प्रधान का हमला
सुनील प्रधान ने कहा कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार इस कदर फैल चुका है कि किसान को समाधान की जगह शिकार समझा जाता है।
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तुलना जंगल के गुलदार से – “जैसे गुलदार जंगल में गर्दन पकड़कर झपट्टा मारता है, वैसे ही अधिकारी किसान पर झपटते हैं।”
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तहसील, आरटीओ, चकबंदी, यातायात विभाग – हर जगह किसान परेशान।
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समस्या सुनना तो दूर, अधिकारी फाइल तक आगे नहीं बढ़ाते।
वन विभाग पर सीधा वार, “गुलदार का आतंक रोकना कब होगा?”
- ग्रामीण इलाकों में तेंदुए (गुलदार) के हमले बढ़े, मवेशियों और लोगों की जान जोखिम में।
- वन विभाग की लापरवाही पर नाराज़गी – “कार्रवाई के नाम पर सिर्फ बयानबाजी”।
चोरी, बाढ़ और स्मार्ट मीटर, किसानों की तिहरी मार
- चोरी की वारदातें: गांवों में बढ़ता असुरक्षा का माहौल।
- बाढ़ की समस्या: राहत प्रबंधन की कमी से किसान बेहाल।
- स्मार्ट मीटर विवाद: गलत रीडिंग और भारी बिल से किसानों की जेब पर डाका।
स्वास्थ्य सेवाओं का संकट
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ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र निष्क्रिय, आपातकालीन इलाज का अभाव।
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किसान इलाज के लिए शहरों पर निर्भर – समय और धन दोनों की बर्बादी।
नया आर्थिक संकट, “क्रेडिट कार्ड नवीनीकरण बंद”
- किसान छोटे-मोटे कृषि कार्य के लिए सोसाइटी से ऋण लेते थे।
- अब बैंकों ने ऋणधारक किसानों के क्रेडिट कार्ड का नवीनीकरण रोक दिया।
- बीज, खाद, सिंचाई – सभी पर असर, फसल चक्र बिगड़ने की आशंका।
आंदोलन का रोडमैप तय
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13 अगस्त: बिजनौर कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत।
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15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस पर कलेक्ट्रेट परिसर में झंडा फहराने की चेतावनी – “समाधान नहीं तो आंदोलन तेज़ होगा।”
पंचायत में जुटे ये किसान नेता
मनप्रीत सिंह, ठाकुर राम अवतार सिंह, मुकेश कुमार, जितेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, अमित कुमार, डॉ. विजय सिंह, संदीप त्यागी, कोमन सिंह, विनीत मौर्य, मोनू प्रधान, रजनीश अहलावत, पंकज शेरावत, आकाश चौधरी, सौरभ काकरान, शुभम चौधरी, भानु प्रताप सिंह, अजीत कुमार, जितेंद्र शर्मा, अनिल कुमार, अजय कुमार, मास्टर शॉप पाल सिंह, कर्मेंद्र सिंह, राकेश कुमार, बृजेश कुमार, अमरदीप सिंह, ऋषिपाल प्रधान सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
संपादकीय टिप्पणी
भाकियू की यह पंचायत सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि किसानों की रोज़मर्रा की पीड़ा और सरकारी सिस्टम की कमजोरियों का दस्तावेज़ है। प्रशासन के लिए यह चेतावनी है कि अगर समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन सिर्फ बिजनौर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैल सकता है।












