धार्मिक विवाद पर सियासत गरमाई
हरिहर मंदिर में जलाभिषेक की कोशिश पर शिव सैनिकों को किया हाउस अरेस्ट

रिपोर्ट: धामपुर/संभल | TargetTVLive
मुख्य बिंदु (NEWS HIGHLIGHTER):
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संभल के विवादित हरिहर मंदिर में जलाभिषेक की योजना थी शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं की।
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खुफिया अलर्ट के बाद पुलिस ने जिलाध्यक्ष संजय राणा को किया हाउस अरेस्ट।
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शिवसेना ने इसे “सनातन विरोध” करार देते हुए भाजपा सरकार पर साधा निशाना।
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हरिहर मंदिर को लेकर फिर से धार्मिक विवाद गर्माया, कानून व्यवस्था की चुनौती बढ़ी।
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सैकड़ों शिवसैनिकों के जुटने की आशंका को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात।
समाचार विस्तार से:
संभल जनपद में स्थित विवादित हरिहर मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। श्रावण मास में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए शिवसेना (यूबीटी) ने संभल नगर कूच करने की योजना बनाई थी। लेकिन, खुफिया तंत्र से मिली सूचना के आधार पर धामपुर पुलिस ने ऐन मौके पर कार्यवाही करते हुए जिलाध्यक्ष चौ. संजय राणा को उनके मुरलीवाला गांव स्थित आवास पर नजरबंद कर दिया।
कोतवाल की तत्परता से टला टकराव
कोतवाल सुमित राठी की सतर्कता और प्रशासनिक सूझबूझ के चलते संभावित टकराव को टाल दिया गया। उनके आदेश पर पुलिस बल ने राणा के आवास को घेर लिया, जिससे शिव सैनिकों की रवानगी रुक गई।
राजनीतिक बयान और आरोप:
शिवसेना जिलाध्यक्ष चौधरी संजय राणा ने तीखा हमला करते हुए कहा –
“देश और प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है, फिर भी सनातन अनुयायियों को अपने आराध्य शिव पर जल नहीं चढ़ाने दिया जा रहा — यह दुर्भाग्यपूर्ण है।“
उन्होंने हरिहर मंदिर को श्रीराम जन्मभूमि की तरह धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कानूनी समाधान की मांग की।
शिवसेना की सक्रियता:
इस मौके पर शिवसेना के प्रमुख पदाधिकारी –
- जिला महासचिव डा. सीपी सिंह,
- जिला सचिव महेंद्र सिंह सिरोही,
- तहसील अध्यक्ष सरदार कुलदीप सिंह,
- ब्लॉक अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राठौर
सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे प्रशासनिक चिंता गहराई है।
पृष्ठभूमि: क्या है हरिहर मंदिर विवाद?
संभल स्थित हरिहर मंदिर को लेकर हिंदू संगठनों का दावा है कि यह सनातन आस्था का केंद्र है, जबकि प्रशासन इसे संवेदनशील स्थल मानता है। पहले भी कई बार इस स्थान को लेकर धार्मिक तनाव की स्थिति बनी है।
प्रशासन की स्थिति:
- जिला प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से किसी भी धार्मिक आयोजन की अनुमति देने से बचता रहा है।
- इस बार भी टकराव की आशंका के चलते पहले से कार्रवाई की गई
रविवार सुबह से ही मुरलीवाला गांव में पुलिस की कड़ी निगरानी, हर गतिविधि पर पैनी नजर।
ग्रामीणों में हलचल, शिवसैनिकों के समर्थन में माहौल गर्म।
विश्लेषण:
- श्रावण मास में धार्मिक आस्था और राजनीति का टकराव एक बार फिर सामने आया है।
- हरिहर मंदिर को लेकर भविष्य में बड़ा आंदोलन शुरू हो सकता है।
- प्रशासन को सामंजस्य और संवाद की रणनीति अपनानी होगी, नहीं तो स्थानीय तनाव बढ़ सकता है।
निष्कर्ष:
यह मामला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन का नहीं, बल्कि धार्मिक अधिकार बनाम प्रशासनिक सतर्कता की बहस को जन्म देता है। आने वाले दिनों में हरिहर मंदिर की राजनीति और ज्यादा उबाल पकड़ सकती है।
आपका क्या मानना है – क्या प्रशासन की ये कार्रवाई जायज़ है या सनातन आस्था पर अंकुश? नीचे कमेंट करें।
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