तालाब में फैली प्रदूषणकारी राख बनी मौत का कारण : मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत, तीन झुलसे

बिजनौर(पेदी): औद्योगिक प्रदूषण और अवैध राख निस्तारण की लापरवाही एक परिवार के लिए भारी साबित हुई। थाना कोतवाली शहर के निकटवर्ती गाँव पेदी में एक मासूम बच्ची की जान चली गई और उसके माता-पिता सहित एक पड़ोसी बुरी तरह झुलस गए। यह घटना तब घटी जब तीन वर्षीय अनबिया खेलते-खेलते तालाब के किनारे पहुँची और वहाँ फैली कारखानों की गर्म राख में गिर गई। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर उसे बचाने दौड़े माता-पिता भी झुलस गए। पड़ोसी कालवा ने भी उन्हें बचाने की कोशिश की, जिससे वह भी झुलस गया।
ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को राख से बाहर निकाला और उन्हें नज़दीकी अस्पताल पहुँचाया। चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य तीन झुलसे लोगों का इलाज जारी है। इस दर्दनाक हादसे ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और औद्योगिक प्रदूषण को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, मगर सवाल अनसुलझे
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसडीएम सदर ने प्रदूषण विभाग को राख की जांच करने के निर्देश दिए, जिसके बाद विभाग के अधिकारियों ने घटनास्थल से नमूने एकत्रित किए। पुलिस ने मृतका बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
औद्योगिक कचरे का अवैध निस्तारण बना खतरा
इस घटना ने औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तालाब में कारखानों की राख डालना कानूनी रूप से अपराध है, लेकिन प्रशासन की लापरवाही और उद्योगों की मनमानी के कारण यह सिलसिला जारी है। औद्योगिक राख में मौजूद रासायनिक तत्व जल स्रोतों को प्रदूषित करने के साथ-साथ जीव-जंतुओं और इंसानों के लिए भी घातक साबित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों में रोष, प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग घटना के बाद स्थानीय निवासियों में रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले भी इस राख के कारण होने वाले खतरों के बारे में प्रशासन को अवगत करा चुके थे, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब जब इसने एक मासूम की जान ले ली और तीन लोग झुलस गए, तो प्रशासन हरकत में आया है। लोगों की मांग है कि दोषी कारखानों पर कठोर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं।
क्या होगी प्रशासन की अगली कार्रवाई?
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से जांच करता है और दोषी उद्योगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।
यह घटना एक चेतावनी है कि अगर प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में और भी बड़ी त्रासदियाँ घट सकती हैं।










