नरेगा में मशीनों का उपयोग: नियमों की अनदेखी या अनियमितता ?

ग्राम पंचायत पैजनियां में नरेगा के तहत तालाब निर्माण में जेसीबी का प्रयोग

BIJNOR. ग्राम पंचायत पैजनियां में नरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत तालाब निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन इस योजना के मूलभूत नियमों का उल्लंघन करते हुए मानव श्रम के स्थान पर मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। ग्राम पंचायत के गाटा संख्या 301 और 302 में पिछले एक महीने से यह कार्य जारी है, जिसमें जेसीबी जैसी भारी मशीनों का प्रयोग हो रहा है।
शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन
स्थानीय नागरिकों द्वारा इस अनियमितता के संबंध में कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। तालाब की मिट्टी को अन्यत्र ले जाने के भी प्रमाण फोटो और वीडियो के माध्यम से सामने आए हैं, जिससे इस कार्य में अनियमितता की संभावना और अधिक प्रबल हो जाती है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
जब इस विषय पर जिला पंचायत राज अधिकारी दमनप्रीत अरोरा से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि तालाब नरेगा योजना के तहत ही खुदवाया जा रहा है। दूसरी ओर, बीडीओ दिनेश शर्मा ने यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें इस योजना की कोई जानकारी नहीं है। ग्राम पंचायत सचिव ने इस कार्य को 15वें वित्त आयोग एवं नरेगा दोनों से करवाए जाने की बात स्वीकार की, जिससे अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास उजागर हुआ।
अनियमितताओं की संभावना मजबूत
अधिकारियों के अलग-अलग बयानों और मशीनों के प्रयोग से यह मामला संदेहास्पद बनता जा रहा है। नरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन मशीनों के उपयोग से इस योजना की मूल भावना को ठेस पहुंचाई जा रही है। यदि यह अनियमितता साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही की जानी चाहिए।
नरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में इस प्रकार की लापरवाही और नियमों की अनदेखी न केवल योजना की साख को प्रभावित करती है, बल्कि स्थानीय श्रमिकों के रोजगार अवसरों को भी नुकसान पहुंचाती है। प्रशासन को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।










