जातिसूचक अपशब्दों और धमकियों का शिकार ग्रामीण, प्रशासन मौन

बिजनौर। जिले के यूसुफपुर हमीद गांव में एक दलित व्यक्ति को जातिसूचक गालियों, धमकियों और मारपीट का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा। पीड़ित मुनेन्द्र कुमार ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़ित के अनुसार, गांव के ही मुन्नू पुत्र गणेशी ने उसके घर के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर दी, जिससे उसके परिवार को आने-जाने में दिक्कत हो रही थी। इस पर उसने प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 31 मार्च को मुन्नू और उसके कुछ साथियों ने न केवल जातिसूचक गालियां दीं, बल्कि मारपीट पर भी उतारू हो गए।
मुनेन्द्र कुमार का आरोप है कि मुन्नू ने उसे और उसके परिवार को धमकाया और कहा कि वह उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत न करे। इतना ही नहीं, आरोपी ने कथित रूप से हाथ में तमंचा लेकर जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़ित का कहना है कि उसने कई बार पुलिस को शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
प्रशासनिक लापरवाही सवालों के घेरे में
इस घटना ने प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक दलित व्यक्ति को खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं और उसकी शिकायतों को अनसुना किया जा रहा है, तो यह कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
यह मामला सामाजिक भेदभाव और प्रशासनिक उदासीनता का एक उदाहरण बन चुका है। यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्थिति किसी बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन दलितों की सुरक्षा और न्याय की गारंटी देने के लिए कोई कदम उठाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?










