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बिजली निजीकरण के खिलाफ उबाल, बुलंदशहर और गाजियाबाद की बिजली पंचायत में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप

बिजली निजीकरण के खिलाफ उबाल, बुलंदशहर और गाजियाबाद की बिजली पंचायत में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों का विरोध तेज होता जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर आज बुलंदशहर और गाजियाबाद में आयोजित बिजली पंचायतों में बिजली के निजीकरण को लेकर सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए। विरोध प्रदर्शन में बिजली कर्मचारियों और उपभोक्ताओं ने एक स्वर में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की।

भ्रष्टाचार और पारदर्शिता पर सवाल

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में शासन की पारदर्शिता की बात कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर बिजली निजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता पूरी तरह से नदारद है। पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन बिडिंग की सामान्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं कर रहा है और निजीकरण को जल्दबाजी में अंजाम देने के लिए नियमों की अनदेखी कर रहा है। समिति ने आरोप लगाया कि ट्रांजैक्शन कंसलटेंट की नियुक्ति में भी हितों के टकराव (Conflict of Interest) को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका है।

बिजली पंचायतों का बढ़ता दबाव

संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि निजीकरण के खिलाफ हर जिले में बिजली पंचायतों का आयोजन किया जाएगा। आज बुलंदशहर और गाजियाबाद में आयोजित बिजली पंचायतों में सैकड़ों बिजली कर्मचारियों और उपभोक्ताओं ने हिस्सा लिया। गाजियाबाद की पंचायत में नोएडा और हापुड़ के बिजली कर्मचारी भी शामिल हुए। पंचायत में पारित प्रस्ताव के जरिए प्रदेश सरकार से मांग की गई कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के 42 जिलों में चल रही निजीकरण प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए।

प्रदेशभर में विरोध की लहर

बिजली निजीकरण के खिलाफ विरोध की लहर पूरे प्रदेश में फैलती जा रही है। आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में भी विरोध सभाएँ हुईं। इन विरोध सभाओं में बिजली कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार ने निजीकरण की प्रक्रिया को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

लखनऊ में 9 अप्रैल को महा रैली की तैयारी

संघर्ष समिति ने 9 अप्रैल को लखनऊ में एक विशाल रैली करने की घोषणा की है, जिसमें पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारी शामिल होंगे। इससे पहले 24 मार्च को मेरठ और 29 मार्च को वाराणसी में बिजली महा पंचायतों का आयोजन होगा, जहां निजीकरण के खिलाफ आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

क्या कहती है सरकार?

सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, पहले दिए गए बयानों में सरकार का दावा रहा है कि निजीकरण से बिजली आपूर्ति में सुधार होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। लेकिन संघर्ष समिति का कहना है कि निजीकरण से उपभोक्ताओं की बिजली दरें बढ़ेंगी और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी होगी।

आगे क्या?

बिजली कर्मचारियों के इस व्यापक विरोध और बढ़ते जन समर्थन को देखते हुए यह साफ है कि निजीकरण का मुद्दा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार बिजली कर्मचारियों की मांगों पर विचार करेगी या फिर टकराव और बढ़ेगा? आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा तय होगी, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण अब एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है।

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