कण्व ऋषि आश्रम का निरीक्षण: विकास कार्यों को गति देने के निर्देश

बिजनौर : जनपद के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल कण्व ऋषि आश्रम के विकास कार्यों की गति तेज करने के लिए जिलाधिकारी जसजीत कौर ने स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से जायजा लिया और कार्यदायी संस्था को सख्त निर्देश दिए कि निर्माण सामग्री में कोई भी अनियमितता न हो और सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं।
आश्रम को पर्यटन केंद्र बनाने की योजना
कण्व ऋषि आश्रम, जो लगभग 61 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है, न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। जिलाधिकारी ने इस स्थल को पर्यटन और आस्था का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए सौंदर्यीकरण की योजना पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि आश्रम से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों, विशेष रूप से ऋषि कण्व और राजा भरत से संबंधित प्रसंगों का चित्रण और लेखन कराया जाए, ताकि यह स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बन सके।
गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्थायी गौशाला की व्यवस्था को भी परखा और इसे आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि गौशाला में साधारण गोवंशों के साथ-साथ दुधारू गायों को भी रखा जाए और गोबर का जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जाए। यह पहल आश्रम को स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ जैविक कृषि को भी प्रोत्साहित करेगी।
सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की मांग
निरीक्षण के दौरान स्वयंसेवी संस्था के सदस्य पद्म सिंह अहलावत ने जिलाधिकारी के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण मांगें भी रखीं। इनमें गंगा मालन बंध की समुचित मरम्मत और मजबूती के लिए पत्थर लगवाने, नवनिर्मित भवन में विद्युत कनेक्शन प्रदान करने और एक पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग शामिल थी। इन सभी मांगों को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया और उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।
संभावनाओं से भरपूर कण्व ऋषि आश्रम
कण्व ऋषि आश्रम के विकास कार्यों में तेजी लाने की यह पहल न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी। यदि यहां उचित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और धार्मिक, ऐतिहासिक व पर्यावरणीय दृष्टि से इसे संवारा जाता है, तो यह क्षेत्र पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है।
जिलाधिकारी के इस निरीक्षण और निर्देशों से स्पष्ट है कि प्रशासन कण्व ऋषि आश्रम को एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए गंभीर है। अब देखने वाली बात होगी कि इन योजनाओं पर अमल कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से किया जाता है।












