उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों का निजीकरण के खिलाफ प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन

सरकार के निजीकरण प्रयासों के विरोध में कर्मचारियों का संघर्ष तेज़, 50 हजार संविदा कर्मियों पर संकट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों के संगठनों ने निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर 4 फरवरी को पूरे प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों को वापस नहीं लिया गया, विशेष रूप से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने का टेंडर निरस्त नहीं किया गया, तो अगले सप्ताह आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका
संघर्ष समिति के अनुसार, राज्य सरकार के निजीकरण के प्रयासों के तहत संविदा कर्मियों की संख्या में भारी कटौती की योजना बनाई गई है। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार और विद्युत प्रबंधन जानबूझकर संविदा कर्मियों को हटाने का रास्ता साफ कर रही है। प्रबंधन के आदेश के अनुसार, संविदा कर्मियों के कांट्रेक्ट की समाप्ति पर 20% छंटनी की जा रही है। इस नीति के चलते, एक वर्ष में संविदा कर्मियों की संख्या में 40% तक की कमी आ सकती है।
संघर्ष समिति ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन दोनों निगमों में कुल मिलाकर लगभग 50 हजार संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। अगर सरकार निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है, तो इन सभी कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडराने लगेगा।
नियमित कर्मचारियों पर भी खतरा, हजारों पद समाप्त होने की संभावना
संघर्ष समिति के अनुसार, केवल संविदा कर्मियों को ही नहीं, बल्कि नियमित कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित करने की योजना बनाई जा रही है। निजीकरण के बाद अनुमानित 23,818 नियमित कर्मचारियों, 2,154 जूनियर इंजीनियरों और 1,519 अभियंताओं के पद समाप्त होने का खतरा है।
कर्मचारी संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार निजीकरण को सुचारु रूप से लागू करने के लिए जबरन कर्मचारियों को सेवा निवृत्त करने की रणनीति अपना रही है। यह नीति कर्मचारियों के अधिकारों और रोज़गार सुरक्षा पर सीधा हमला है।
बिजली कर्मचारियों के प्रदर्शन से बढ़ा सरकार पर दबाव
संघर्ष समिति द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, जवाहरपुर, पनकी, हरदुआगंज, ओबरा, पिपरी और अनपरा सहित कई शहरों और जिलों में व्यापक प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में बिजली कर्मियों ने हिस्सा लिया और सरकार की निजीकरण नीति के खिलाफ आवाज बुलंद की।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संघर्ष समिति ने साफ शब्दों में कहा है कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को और आक्रामक रूप दिया जाएगा। यदि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने का टेंडर वापस नहीं लिया गया, तो अगले सप्ताह प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति अपनाई जाएगी।
सरकार के लिए यह प्रदर्शन एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि यदि आंदोलन तेज हुआ, तो राज्य में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा पहले भी विवादों में रहा है, और अब इस ताजा आंदोलन ने इसे फिर से केंद्र में ला दिया है। सरकार की अगली रणनीति क्या होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।












