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ड्राफ्ट्समैन को अभियंता का लाइसेंस: नियत प्राधिकारी की कार्यशैली पर सवाल

ड्राफ्ट्समैन को अभियंता का लाइसेंस: नियत प्राधिकारी की कार्यशैली पर सवाल

प्रतीकात्मक चित्र

बिजनौर: विनियमित क्षेत्र के नियत प्राधिकारी की ओर से एक ड्राफ्ट्समैन को अभियंता का लाइसेंस देने का मामला सामने आया है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप लग रहा है। यह मामला उजागर होने के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

कैसे हुआ नियमों का उल्लंघन ?

नियमों के अनुसार, अभियंता का लाइसेंस केवल योग्यताधारी इंजीनियर को ही प्रदान किया जा सकता है, जिसे मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त हो। लेकिन, इस मामले में नियत प्राधिकारी ने एक ड्राफ्ट्समैन को अभियंता के रूप में मान्यता दे दी, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया में न केवल तकनीकी मानकों को नजरअंदाज किया गया, बल्कि इस निर्णय से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। एक गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा अभियंता की भूमिका निभाना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

नियत प्राधिकारी का बचाव

जब इस मुद्दे पर नियत प्राधिकारी (उपजिलाधिकारी) से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सवाल यह उठता है कि एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी को इतनी बड़ी अनियमितता की जानकारी क्यों नहीं थी? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या किसी बड़े भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है?

जिलाधिकारी के बोल: इस संबंध में जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कहा कि इस मामले की गहराई से जांच कराकर उचित करवाई अमल में लाई जाएगी।

भ्रष्टाचार की आशंका ?

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अवैध लाइसेंस बिना किसी आंतरिक सहमति के जारी नहीं हो सकते। अक्सर इस तरह के मामलों में आर्थिक लेन-देन और प्रशासनिक मिलीभगत की संभावनाएं होती हैं। यदि इस मामले की गहराई से जांच की जाए, तो कई और अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।

संभावित परिणाम और आवश्यक कदम

यदि इस तरह की अनियमितताएं जारी रहती हैं, तो भविष्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही, अभियंता लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाया जाए ताकि इस प्रकार की अनियमितताओं को रोका जा सके।

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि नियमों की अनदेखी किस तरह से गंभीर परिणाम ला सकती है। नियत प्राधिकारी की भूमिका पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं और अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या सख्त कार्रवाई होती है या यह मामला अन्य कई मामलों की तरह सिर्फ जांच तक ही सीमित रह जाएगा।

 

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