बिजनौर शिक्षा विभाग में हड़कंप! छात्र झुलसा, शिक्षक गायब, शिक्षिका विदेश में… तीन पर बड़ी कार्रवाई
बेसिक शिक्षा विभाग की जांच में खुली चौंकाने वाली हकीकत, तीन शिक्षकों पर गिरी गाज… लेकिन सवाल अभी भी बाकी
बिजनौर।
सरकारी स्कूल… जहां बच्चों को सुरक्षित शिक्षा देने का दावा किया जाता है।
लेकिन बिजनौर में जो तस्वीर सामने आई है, उसने पूरे शिक्षा तंत्र की नींव हिला दी है।
एक स्कूल में बच्चों के सिर के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजरती रही और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे रहे।
दूसरे स्कूल में गुरुजी महीनों तक गायब रहे, लेकिन सिस्टम उन्हें ढूंढता ही रह गया।
तीसरे मामले में शिक्षिका विदेश में रह रही थीं और इधर सरकारी रिकॉर्ड में नौकरी चलती रही।
अब तीनों मामलों में कार्रवाई हुई है, लेकिन इन घटनाओं ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी स्कूल बच्चों की पढ़ाई के केंद्र हैं या लापरवाही का अड्डा?
स्कूल की छत पर खेल रहे थे बच्चे… ऊपर मौत दौड़ रही थी
कोतवाली क्षेत्र के हरवंशपुर धारम स्थित संविलियन विद्यालय की तस्वीर ने हर अभिभावक को डरा दिया।
विद्यालय परिसर के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी। बच्चे रोज उसी के नीचे खेलते थे। बताया जा रहा है कि बिजली विभाग कई बार लाइन हटाने पहुंचा, लेकिन स्कूल प्रशासन ने सहयोग नहीं किया।
जांच में यह भी सामने आया कि एक बार बिजली विभाग की टीम का विरोध करते हुए स्कूल का गेट तक बंद कर दिया गया था।
फिर एक दिन वही हुआ जिसका डर था।
मिड-डे मील खाने के बाद बच्चे खेल रहे थे। तभी कक्षा-7 का छात्र हरीश टॉयलेट की छत पर चढ़ गया और हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया।
सोचिए…
अगर उस दिन बच्चे की जान चली जाती तो जिम्मेदार कौन होता?
इस हादसे ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी।
गुरुजी गायब… स्कूल चलता रहा ‘भगवान भरोसे’
हल्दौर क्षेत्र का मामला भी कम चौंकाने वाला नहीं है।
यहां एक शिक्षक लंबे समय से बिना सूचना स्कूल से गायब मिले। विभाग फोन करता रहा, नोटिस भेजता रहा, लेकिन न जवाब मिला और न ही गुरुजी के दर्शन हुए।
हैरानी की बात यह है कि यह कोई पहली शिकायत नहीं थी। निरीक्षण के दौरान भी शिक्षक पहले कई बार अनुपस्थित पाए जा चुके थे।
यहां तक कि चुनाव ड्यूटी जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी में भी लापरवाही सामने आई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षक स्कूल ही नहीं पहुंच रहे थे, तब बच्चों की पढ़ाई कौन करा रहा था?
क्या बच्चों का भविष्य ऐसे ही “एडजस्टमेंट सिस्टम” के भरोसे चल रहा था?
विदेश में रहकर सरकारी नौकरी! जांच में खुला बड़ा खेल
तीसरा मामला सुनकर लोग दंग रह गए।
बुढ़नपुर क्षेत्र की एक शिक्षिका बिना अनुमति विदेश में रह रही थीं और लंबे समय से स्कूल से गायब थीं।
जांच में सामने आया कि शिक्षिका पहले भी लंबे अवैतनिक अवकाश पर थीं। बाद में वह विदेश चली गईं, लेकिन जरूरी विभागीय अनुमति नहीं ली गई।
अपने बचाव में उन्होंने परिवार और बच्चों की मजबूरी बताई, लेकिन विभाग ने इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।
अब गांव के लोग पूछ रहे हैं—
“मैडम विदेश में थीं तो स्कूल में बच्चों को पढ़ा कौन रहा था?”
यानी सरकारी वेतन यहां से और जिंदगी विदेश में!
क्या सिर्फ निलंबन से बदल जाएगी शिक्षा व्यवस्था?
तीनों मामलों ने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या सरकारी स्कूलों की निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित है?
- क्या बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है?
- क्या विभागीय निरीक्षण केवल फाइलों की खानापूर्ति हैं?
- आखिर महीनों तक सिस्टम को कुछ दिखाई क्यों नहीं दिया?
ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूल गरीब परिवारों के बच्चों की सबसे बड़ी उम्मीद होते हैं। लेकिन जब वहां सुरक्षा नहीं, शिक्षक नहीं और जवाबदेही नहीं, तो सबसे बड़ा नुकसान बच्चों के भविष्य का होता है।
कार्रवाई से मचा हड़कंप, अब कई और स्कूल रडार पर
सूत्रों की मानें तो विभाग अब जिले के कई अन्य स्कूलों की भी निगरानी कर रहा है। लगातार बढ़ती शिकायतों और मीडिया में उठते सवालों के बाद अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया है।
फिलहाल तीन शिक्षकों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इससे जमीन पर बदलाव भी दिखेगा या फिर कुछ दिनों बाद सब पहले जैसा हो जाएगा?
बिजनौर की ये तीन घटनाएं सिर्फ विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के उस चेहरे को सामने लाती हैं जिसे अक्सर फाइलों और दावों के पीछे छिपा दिया जाता है।
विशेष खोजी रिपोर्ट : अवनीश त्यागी
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