मुरादाबाद में धर्म का महाउत्सव: 21वां महाव्रत पारायण और पत्रिका विमोचन ने रचा इतिहास
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📍 मुरादाबाद | विशेष संवाददाता
मुरादाबाद एक बार फिर धार्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना के रंग में रंगा नजर आया, जब भगवान परशुराम सेवा समिति के तत्वावधान में इक्कीसवां महाव्रत पारायण एवं व्रतोत्सव पत्रिका (संवत् 2083 / 2026-27) का भव्य आयोजन किया गया। रेलवे मनोरंजन सदन, कम्पनी बाग में आयोजित इस कार्यक्रम ने हजारों श्रद्धालुओं को एक मंच पर जोड़कर आस्था का अद्भुत उदाहरण पेश किया।
शुभारंभ से ही दिखी दिव्यता, भक्ति में डूबा माहौल
कार्यक्रम की शुरुआत माँ भगवती और भगवान परशुराम की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि के साथ हुई।
भजन गायक राजकुमार गोस्वामी की गणेश वंदना ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
जैसे-जैसे भजन आगे बढ़े, गायिका वंदना राही की मधुर प्रस्तुति “कब होगा मैया दीदार तेरा” पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे—पूरा सभागार भक्ति में सराबोर नजर आया।
पत्रिका विमोचन: परंपरा, ज्ञान और संस्कार का संगम
इस अवसर पर गुरु कृपाचार्य द्वारा प्रतिपादित व्रतोत्सव पत्रिका का भव्य विमोचन किया गया।
यह पत्रिका केवल धार्मिक जानकारी का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, व्रत-उपवास और जीवन मूल्यों को संजोने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी ने बढ़ाई गरिमा
कार्यक्रम में डॉ. के.के. मिश्रा, डॉ. प्रदीप शर्मा, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अमिताभ जोशी, डॉ. वंदना वशिष्ठ, डॉ. इन्दू पारिख और शकुंतला पारिख जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी विशेष बना दिया।
समिति अध्यक्ष पं. अनिमेष शर्मा, संरक्षक पं. उमेश त्रिवेदी और पं. संजय स्वामी ने संस्था की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को साझा किया।
महिलाओं की भागीदारी बनी कार्यक्रम की खास पहचान
माँ रेणुका वाहिनी द्वारा माँ भगवती का भव्य श्रृंगार कर चुनरी चढ़ाई गई और मेवा-मिष्ठान का भोग लगाया गया।
इसके साथ ही महिलाओं को सुहाग चूड़ियां और सिन्दूर भेंट कर सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त संदेश दिया गया।
सम्मान समारोह: विद्वानों और सहयोगियों का अभिनंदन
पत्रिका निर्माण में योगदान देने वाले विद्वानों को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में समिति पदाधिकारियों, माँ रेणुका वाहिनी और भगवान श्री परशुराम सेना के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
विश्लेषण: क्यों खास है यह आयोजन?
👉 यह कार्यक्रम केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का मजबूत माध्यम बनकर उभरा।
✔ नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने की पहल
✔ समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा
✔ सामूहिक भागीदारी से सामाजिक समरसता को मजबूती
📌 साफ है कि ऐसे आयोजन अब सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सशक्त प्लेटफॉर्म बनते जा रहे हैं।
समापन: आरती और प्रसाद के साथ भव्य अंत
कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
अंत में समिति अध्यक्ष पं. अनिमेष कुमार शर्मा ने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
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