किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगी कार्बन क्रेडिट योजना : DM

BIJNOR. भारत सरकार के 2070 तक देश को कार्बन शून्य बनाने के लक्ष्य के तहत किसानों के लिए कृषि वानिकी के माध्यम से आय बढ़ाने का नया अवसर उपलब्ध होगा। जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने जानकारी दी कि इस योजना के अंतर्गत किसानों को तेजी से बढ़ने वाले वृक्षों जैसे पापुलर, मीलिया डूबिया और सेमल आदि के पौधों का रोपण करना होगा। इन पौधों से अर्जित कार्बन क्रेडिट के माध्यम से किसानों को प्रत्येक वृक्ष के लिए ₹250 से ₹350 तक अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
जिलाधिकारी ने बताया कि वैश्विक प्रदूषण के कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, लेकिन भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह वृक्षारोपण के माध्यम से धन अर्जित करने का एक सुअवसर है। इस प्रक्रिया में ग्रीनहाउस गैसों को अवशोषित कर कार्बन क्रेडिट अर्जित किया जाएगा, जिसे विकसित देशों को बेचकर धन प्राप्त किया जा सकेगा। स्वच्छ विकास प्रक्रिया (सीडीएम) के तहत औद्योगिक देशों को विकासशील देशों में पर्यावरणीय मित्र परियोजनाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
पहले चरण में छह मंडलों का चयन
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कार्बन फाइनेंस के माध्यम से किसानों को लाभान्वित करने के लिए प्रथम चरण में मुरादाबाद सहित छह मंडलों का चयन किया गया है। इसमें 4,697 किसानों को शामिल किया गया है और अनुमानित 38.05 करोड़ कार्बन क्रेडिट प्राप्त होने का लक्ष्य है। प्रत्येक पांचवें वर्ष $6 प्रति कार्बन क्रेडिट के हिसाब से किसानों की आय में वृद्धि होगी।
दूसरे चरण में सात और मंडल शामिल होंगे
जिलाधिकारी ने आगे बताया कि योजना के दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश के सात और मंडलों का चयन किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य के किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा। योजना के क्रियान्वयन में जर्मन संस्था जीआईजेड का सहयोग लिया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें और इस योजना का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि करें। कार्बन क्रेडिट योजना न केवल किसानों के लिए लाभदायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह एक महत्वपूर्ण कदम है।












