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मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस में भ्रष्टाचार: एक विशिष्ट जन सेवा केंद्र और एसोसिएशन पर उठते सवाल

मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस में भ्रष्टाचार: एक विशिष्ट जन सेवा केंद्र और एसोसिएशन पर उठते सवाल

BIJNOR. मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। एक विशिष्ट जन सेवा केंद्र को इस प्रक्रिया का एकमात्र माध्यम बनाए जाने पर कई सवाल उठ रहे हैं। साथ ही, मेडिकल स्टोर्स एसोसिएशन के कुछ सदस्यों पर भी इस भ्रष्ट व्यवस्था में ‘प्यादों’ की भूमिका निभाने के आरोप लगे हैं।

लाइसेंस प्रक्रिया और एक विशिष्ट जन सेवा केंद्र

मेडिकल स्टोर्स खोलने के लिए आवश्यक लाइसेंस आवेदन अब एक विशिष्ट जन सेवा केंद्र के माध्यम से ही किए जा रहे हैं। पिछले एक वर्ष में जितने भी आवेदन हुए, वे इसी केंद्र से होकर गुजरे। आरोप है कि इस केंद्र का उपयोग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में घूसखोरी और अनियमितताओं को संगठित रूप से लागू करने के लिए किया जा रहा है।

इस संबंध औषधि निरीक्षक उमेश भारती ने कहा कि किसी भी मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस लेने वाले को प्रेस गाइड उनके द्वारा नहीं किया जाता है। प्रत्येक आवेदक स्वतंत्र रूप से स्वयं या किसी भी जनसेवा केंद्र से आवेदन कर सकते हैं।

एसोसिएशन के सदस्यों की संदिग्ध भूमिका

इस पूरे प्रकरण में मेडिकल स्टोर्स एसोसिएशन के कुछ सदस्यों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा जा रहा है कि ये सदस्य ‘प्यादों’ की भूमिका निभाते हैं, जो लाइसेंस जारी करने के लिए अवैध धन उगाही में मदद करते हैं। इनका काम न केवल स्थानीय व्यवसायियों को दबाव में रखना है, बल्कि वर्धमान जन सेवा केंद्र की प्रक्रियाओं में किसी भी सवाल या विरोध को दबाना भी है।

स्थानीय व्यवसायियों और जनता पर प्रभाव

इस तरह की गड़बड़ियों का सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल स्टोर मालिकों पर पड़ा है।

लाइसेंस प्रक्रिया में बाधा: ईमानदार व्यवसायियों को लाइसेंस के लिए अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर: भ्रष्टाचार के कारण जरूरतमंद क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

आर्थिक शोषण: व्यवसायियों को अनावश्यक रूप से मोटी रकम चुकानी पड़ रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

जरूरी सुधार और कदम

1. पारदर्शिता लाना: लाइसेंस प्रक्रिया को ऑनलाइन और पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न हो।

2. स्वतंत्र जांच समिति: वर्धमान जन सेवा केंद्र और एसोसिएशन के सदस्यों की भूमिका की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जानी चाहिए।

3. सख्त कार्रवाई: भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति, चाहे वह एसोसिएशन का सदस्य हो या वर्धमान जन सेवा केंद्र का कर्मचारी, पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

4. जनता की भागीदारी: व्यवसायियों और आम जनता को इस प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर देकर इसे अधिक जवाबदेह बनाया जा सकता है।

मेडिकल स्टोर्स लाइसेंसिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना समय की मांग है। वर्धमान जन सेवा केंद्र और एसोसिएशन के सदस्यों पर लगे गंभीर आरोपों की जांच कर, दोषियों को दंडित करना चाहिए। इस समस्या का समाधान केवल प्रशासनिक इच्छाशक्ति और कठोर सुधारों के माध्यम से ही संभव है।

मेडिकल स्टोर्स लाइसेंसिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना समय की मांग है। वर्धमान जन सेवा केंद्र और एसोसिएशन के सदस्यों पर लगे गंभीर आरोपों की जांच कर, दोषियों को दंडित करना चाहिए। इस समस्या का समाधान केवल प्रशासनिक इच्छाशक्ति और कठोर सुधारों के माध्यम से ही संभव है।

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