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साहित्य

पढ़े ! प्रियंका सौरभ रचित कविता, “जीवन का माली”

“जीवन का माली” भूमिका: लेखक अवनीश त्यागी  कविता “जीवन का माली” एक प्रेरणादायक रचना है जो जीवन में सही मार्गदर्शन, अनुशासन और शिक्षा के महत्व

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टॉप स्टोरीज

वस्त्रों का प्रभाव: जब परिधान विचारों को प्रभावित करने लगें

वस्त्रों का प्रभाव: जब परिधान विचारों को प्रभावित करने लगें विश्लेषक : अवनीश त्यागी  समाज में परिधानों की भूमिका केवल तन ढकने तक सीमित नहीं

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आज पढ़िए ! प्रियंका सौरभ रचित कविता “जीवन का आधार”

अवनीश त्यागी द्वारा “जीवन का आधार” नामक कविता की  भूमिका लिखते हुए कहा है कि “जीवन का आधार” कविता नारी के गरिमामयी अस्तित्व और उसके

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टॉप स्टोरीज

संवेदनहीन न्याय: जब कानून संवेदनशीलता खो देता है

संवेदनहीन न्याय: जब कानून संवेदनशीलता खो देता है लेखक : प्रियंका सौरभ  विश्लेषक : अवनीश त्यागी हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले

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पढ़े! प्रियंका सौरभ की कविता, “जो अपनों का मान बढ़ाए,वही जग में मान पाए”।

🌟 जो अपनों का मान बढ़ाए,वही जग में मान पाए। –प्रियंका सौरभ (1)संघर्षों में डटे रहो तुम, हाथ अपनों का थाम लो, गैरों के आगे

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टॉप स्टोरीज

युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानकर करियर बनाने की जरूरत: ऑस्कर विजेता रेसुल पुकुट्टी

युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानकर करियर बनाने की जरूरत: ऑस्कर विजेता रेसुल पुकुट्टी रिपोर्ट: सुषमा रानी  नई दिल्ली। ऑस्कर विजेता साउंड डिजाइनर रेसुल पुकुट्टी ने युवाओं

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प्रियंका सौरभ की कविता “माटी अब भी पूछती” ओर उसकी पृष्ठभूमि

    माटी अब भी पूछती , कविता की पृष्ठभूमि लेखक :अवनीश त्यागी  यह कविता एक गहरी संवेदनशीलता और राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत है, जिसमें

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मनोरंजन

विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रियंका सौरभ रचित कविता पढ़िए! “छोड़ो व्यर्थ पानी बहाना…”

              भूमिका पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। मनुष्य की असंयमित गतिविधियों के

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लोककला की आड़ में अश्लीलता: संस्कृति पर संकट या आधुनिकता की मांग

लोककला की आड़ में अश्लीलता: संस्कृति पर संकट या आधुनिकता की मांग अवनीश त्यागी, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट लेखक : प्रियंका सौरभ  भारतीय लोककला और संगीत सदियों

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टॉप स्टोरीज

हृदय का मरूस्थल: भावनात्मक शुष्कता और पुनर्जागरण का प्रतीक

हृदय का मरूस्थल: भावनात्मक शुष्कता और पुनर्जागरण का प्रतीक   सुशी सक्सेना द्वारा रचित “हृदय का मरूस्थल – एक अनुभव” एक गहन और संवेदनशील लेख

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