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प्रियंका सौरभ की कविता “माटी अब भी पूछती” ओर उसकी पृष्ठभूमि

    माटी अब भी पूछती , कविता की पृष्ठभूमि

लेखक :अवनीश त्यागी 

यह कविता एक गहरी संवेदनशीलता और राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत है, जिसमें देश की वर्तमान स्थिति और देशभक्ति की भावना के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से उभरता है। इसकी पृष्ठभूमि को समझने के लिए हमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम, आज़ादी के बाद के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य और वर्तमान परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखना होगा।

पृष्ठभूमि:

  1. शहीद भगत सिंह की विरासत:
    • भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं थे, बल्कि युवाओं के लिए एक विचारधारा थे। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
    • कविता में यह प्रश्न उठता है कि आज के दौर में उनके जैसे वीर क्यों नहीं जन्म लेते? क्या हमारी चेतना इतनी कमजोर हो गई है कि हम केवल उनके नाम का उपयोग कर रहे हैं, पर उनके विचारों को नहीं अपना रहे?
  2. देशभक्ति की बदलती परिभाषा:
    • आज देशभक्ति सिर्फ नारों और मंचीय भाषणों तक सीमित होती जा रही है।
    • पहले जो लोग अपने प्राणों की आहुति देते थे, आज वे अनदेखे और भूले-बिसरे लगते हैं।
    • देश के लिए बलिदान देने की भावना कम होती जा रही है और स्वार्थपरता हावी हो रही है।
  3. राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य:
    • कविता यह भी इंगित करती है कि सत्ता का स्वरूप बदल गया है।
    • सत्ता में बैठे लोग जनता के मुद्दों से भटक चुके हैं और अपनी राजनीति चमकाने में व्यस्त हैं।
    • क्रांति की आग बुझती जा रही है और सत्ताधारी इसे नियंत्रित करने में सफल हो रहे हैं।
  4. युवाओं की निष्क्रियता और समाज की उदासीनता:
    • युवा जोश और क्रांति के प्रतीक होते हैं, लेकिन वे आज अपने मूल मुद्दों से भटके हुए हैं।
    • समाज भी निष्क्रियता की स्थिति में है—क्रांति की बात तो होती है, पर कदम कोई नहीं उठाता।
    • “शब्द बचे हैं युद्ध के, गए कहाँ रणधीर?”—यह पंक्ति इसी वास्तविकता को दर्शाती है।

कविता का संदेश:

यह कविता केवल एक प्रश्न ही नहीं उठाती, बल्कि समाज को आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करती है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सच में अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं? क्या हम भगत सिंह के सपनों का भारत बना पाए? क्या हम अपने स्वार्थों से ऊपर उठकर देश के लिए कुछ कर सकते हैं?

“माटी अब भी पूछती”—यह पंक्ति केवल एक प्रश्न नहीं, बल्कि एक पुकार है, जो देश के हर नागरिक को आत्मविश्लेषण करने के लिए बाध्य करती है।

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