जिलाधिकारी की टास्क फोर्स बैठक में प्राथमिकताएं तय: शिक्षा और स्वास्थ्य पर रहेगा विशेष फोकस
शिक्षक राष्ट्र निर्माता और बच्चे देश का भविष्य, लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई: DM
बिजनौर में प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था दुरुस्त करने के कड़े निर्देश, मिड-डे मील की जांच से लेकर शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति और चुनावी बूथों की मरम्मत तक जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह का मास्टर प्लान।
TargetTvLive | अवनीश त्यागी बिजनौर, 6 नवंबर।
“शिक्षक राष्ट्र के सच्चे निर्माता हैं और बच्चे हमारे देश का स्वर्णिम भविष्य। शिक्षा और स्वास्थ्य जीवन के दो ऐसे बुनियादी स्तंभ हैं, जिन पर समाज की प्रगति टिकी है। इसलिए इन क्षेत्रों में ढिलाई या लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।”
यह बात बिजनौर के जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जनपद स्तरीय टास्क फोर्स तथा ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। जिलाधिकारी ने जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए।
मध्याह्न भोजन की नियमित जांच और सफाई व्यवस्था पर जोर
जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालयों में परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता की नियमित जांच और परिसर में समुचित साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए।
व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी ग्राम प्रधानों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें स्कूलों की देखरेख और मूलभूत सुविधाओं के प्रति संवेदनशील व जागरूक किया जा सके।
शिक्षकों की उपस्थिति पर निगरानी, सरप्राइज चेकिंग की चेतावनी
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देशित किया गया कि प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित कराई जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि वे स्वयं आने वाले दिनों में विद्यालयों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करेंगे, ताकि शिक्षा व्यवस्था और ढांचागत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का मौके पर जायजा लिया जा सके।
चुनाव पूर्व मतदान केंद्रों का कायाकल्प
आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत जिन प्राथमिक विद्यालयों में मतदान केंद्र बनाए जाने हैं, वहां मरम्मत कार्य तत्काल पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
- आधारभूत सुविधाएं: सभी संबंधित स्कूलों में रैंप, खिड़कियों की मरम्मत, सुरक्षित पेयजल और शौचालयों की व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा गया है, जिससे मतदाताओं और स्कूली बच्चों दोनों को सुविधा मिले।
- मानकों का पालन: प्रशासन की प्राथमिकता बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देना है, इसलिए सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे कराए जाएं।
23 करोड़ का मॉडल स्कूल और अभ्युदय योजना: बिजनौर का शिक्षा ढांचा
बैठक के दौरान जिले में संचालित शैक्षणिक व्यवस्था और विकास कार्यों के आंकड़े प्रस्तुत किए गए:
श्रेणी / योजनासंख्या / प्रगति स्थिति कुल संचालित विद्यालय2,119 (1,354 प्राथमिक, 375 उच्च प्राथमिक, 390 कंपोजित) मुख्यमंत्री अभ्युदय स्कूलनिर्माण कार्य पूर्णमुख्यमंत्री मॉडल स्कूल81% कार्य पूर्ण (लागत: ~₹23 करोड़, कार्यदायी संस्था: CNDS)कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय14 (आवासीय व शैक्षणिक गतिविधियों की गहन समीक्षा)
| इसके अतिरिक्त बैठक में ‘उल्लास साक्षरता कार्यक्रम’ की प्रगति की भी समीक्षा की गई। |
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बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रण विजय सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, संबंधित विभागीय अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी तथा समिति के सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।












