‘दावत के नाम पर 1 लाख की रंगदारी!’: बिजनौर में मास्टरजी को ब्लैकमेल करने वाले फर्जी पत्रकारों पर FIR, जातिसूचक गालियां देकर दी धमकी
बिजनौर (उत्तर प्रदेश) | TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट
बिजनौर के बढ़ापुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को झूठी खबर छापने की धमकी देकर एक लाख रुपये की रंगदारी मांगने और जातिसूचक गालियां देने का मामला तूल पकड़ गया है। पीड़ित शिक्षक की शिकायत पर पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
क्या है पूरा मामला? संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय जहानाबाद खोबड़ा के प्रभारी प्रधानाध्यापक अंजीव कुमार ने पुलिस अधीक्षक को दी गई लिखित शिकायत में बताया कि 16 अक्टूबर 2026 को गुरपेज सिंह और नूर मलिक नाम के दो व्यक्ति बिना किसी अनुमति के विद्यालय परिसर में घुस आए। मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) के बाद जब 3-4 बच्चे हैंडपंप पर पानी पी रहे थे, तब इन लोगों ने चुपचाप उनके फोटो खींच लिए। इसके बाद उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर यह झूठी शिकायत दर्ज करा दी कि विद्यालय में बच्चों से थालियां धुलवाई जा रही हैं।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब 24 अक्टूबर 2026 को आरोपी गुरपेज सिंह ने शिक्षक को अपने कार्यालय ‘मानव रिलीफ फाउंडेशन ट्रस्ट’ (टांडा माईदास) बुलाया। वहाँ उनकी पूरी टीम मौजूद थी। आरोपियों ने धमकी दी कि उनकी टीम जिलेभर के स्कूलों को सुधारने की मुहिम चला रही है और अब इस कड़ी में उनके विद्यालय का नंबर है। उन्होंने शिक्षक पर दबाव बनाते हुए कहा कि तुम्हारी सैलरी करीब एक लाख रुपये है, इसलिए हमें एक महीने की सैलरी दो। पीड़ित शिक्षक ने किसी तरह पास के जनसेवा केंद्र से 3,000 रुपये निकालकर और 2,000 रुपये अपने पास से मिलाकर कुल 5,000 रुपये ‘दावत’ के नाम पर दे दिए। लेकिन आरोपियों की भूख इतने पर शांत नहीं हुई और उन्होंने पूरे एक लाख रुपये की मांग कर डाली।
जातिसूचक गालियां और जान से मारने की धमकी जब प्रधानाध्यापक अंजीव कुमार ने एक लाख रुपये देने से साफ मना किया और अपने 5,000 रुपये वापस मांगे, तो आरोपियों ने अपनी औकात दिखाते हुए उन्हें गालियां देनी शुरू कर दीं। आरोपियों ने जातिसूचक शब्द (चमार) का इस्तेमाल करते हुए अपमानित किया और कहा कि सरकार फ्री में नौकरी दे रही है। उन्होंने पूरे स्टाफ (5 शिक्षकों) से 20-20 हजार रुपये वसूलकर एक लाख रुपये पूरा करने का दबाव बनाया। जब शिक्षक ने विरोध किया तो उन्हें धमकाकर भगा दिया गया और अखबार में बच्चों से थालियां धुलवाने की झूठी खबर प्रकाशित करवा दी गई। पीड़ित शिक्षक का कहना है कि वे रोजाना अकेले बाइक से स्कूल आते-जाते हैं, ऐसे में इन फर्जी पत्रकारों से उन्हें और उनके पूरे स्टाफ की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है।
पुलिस की सख्त कार्रवाई घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना बढ़ापुर पुलिस ने 03 नवंबर 2026 को एफआईआर संख्या 0187/2026 दर्ज कर ली है। इस मामले में नामजद आरोपी गुरपेज सिंह, नूर मलिक और अन्य अज्ञात टीम सदस्यों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) (जबरन वसूली/रंगदारी), 352 (शांति भंग के इरादे से अपमान), 351(2) (आपराधिक धमकी) तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम यानी SC/ST Act की धाराओं के तहत कानूनी शिकंजा कसा गया है। इस पूरे प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी (CO) नगीना को सौंपी गई है। प्रशासन का यह सख्त संदेश है कि शिक्षा के मंदिरों को ब्लैकमेलिंग का अड्डा बनाने वाले फर्जी पत्रकारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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