बिजनौर में बिना NOC भूजल निचोड़ने वाली फैक्ट्रियों पर गाज गिरना तय, DM ने दिए कड़े निर्देश: लगेगा भारी जुर्माना!
बिजनौर (उत्तर प्रदेश)।
भूजल के अंधाधुंध दोहन और पर्यावरण के नियमों को ताक पर रखकर चलने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ बिजनौर प्रशासन ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला भूगर्भ जल प्रबन्धन परिषद की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जिले भर की औद्योगिक इकाइयों की जांच कर अवैध भूजल उपयोग करने वाली कंपनियों को नोटिस जारी करने और भारी जुर्माना ठोकने के सख्त निर्देश दिए हैं।
बिजनौर प्रशासन का बड़ा एक्शन प्लान
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने भूगर्भ जल अधिनियम-2019 के प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने पर जोर दिया। प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के मुख्य बिंदु:
- ग्राउंड इंस्पेक्शन के आदेश: संबंधित अधिकारियों की टीम औद्योगिक क्षेत्रों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करेगी।
- NOC की होगी जांच: यह जांचा जाएगा कि फैक्ट्रियों के पास भूजल दोहन का वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) है या नहीं।
- अनियमितता पर पेनल्टी: बिना अनुमति या तय सीमा से अधिक पानी निकालने वाली इकाइयों पर तत्काल नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई व जुर्माना लगाया जाएगा।
- विभागों को जिम्मेदारी: भूगर्भ जल विभाग (मुरादाबाद) समेत सभी संबंधित विभागों को उद्योगपतियों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के भी निर्देश दिए गए।
पानी की हर बूंद का हिसाब, अनियंत्रित दोहन पर ‘जीरो टॉलरेंस’
“जनपद में भूजल के अवैध और अनियंत्रित दोहन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो इकाइयां बिना NOC पानी का दोहन कर रही हैं, वे तुरंत नियम अनुसार रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई के लिए तैयार रहें।” — उमेश प्रताप सिंह, जिलाधिकारी, बिजनौर
क्यों अहम है यह कदम?
उत्तर प्रदेश में तेजी से गिरते वाटर टेबल को देखते हुए शासन भूजल संरक्षण को लेकर बेहद गंभीर है। बिजनौर जैसे औद्योगिक रूप से सक्रिय जिले में फैक्ट्रियों द्वारा अत्यधिक भूजल निकासी से आम जनता के लिए पेयजल का संकट खड़ा होने का खतरा बना रहता है। जिलाधिकारी के इस कड़े फैसले से न केवल भूजल का अंधाधुंध दोहन रुकेगा, बल्कि औद्योगिक इकाइयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग और वाटर रीसाइक्लिंग जैसे तरीकों को अपनाने की अनिवार्यता भी बढ़ेगी।
बैठक में अधिशासी अभियन्ता (भूगर्भ जल विभाग, मुरादाबाद) सहित जिला स्तर के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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