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बिजनौर ‘हर घर नल योजना’ ग्राउंड रिपोर्ट: मार्च 2027 की डेडलाइन, 583 प्रोजेक्ट्स अटके… DM उमेश प्रताप सिंह के अल्टीमेटम से जल निगम में हड़कंप!

बिजनौर ‘हर घर नल योजना’ ग्राउंड रिपोर्ट: मार्च 2027 की डेडलाइन, 583 प्रोजेक्ट्स अटके… DM उमेश प्रताप सिंह के अल्टीमेटम से जल निगम में हड़कंप!

घटिया निर्माण और पानी की गुणवत्ता पर नपेंगे ठेकेदार! डीएम ने दिए ‘ऑन-द-स्पॉट’ फिजिकल वेरिफिकेशन के आदेश, सड़कों के 43 किमी गड्ढे एक हफ्ते में भरने का अल्टीमेटम।

विशेष विश्लेषण: अवनीश त्यागी डिजिटल डेस्क, TargetTvLive 

बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। जनपद में ‘हर घर जल, हर घर नल’ योजना क्या कागजी आंकड़ों से निकलकर हर ग्रामीण के घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचा पाएगी? या फिर ठेकेदारों और कार्यदायी संस्थाओं की लेट-लतीफी जनस्वास्थ्य पर भारी पड़ेगी? कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में जब जिलाधिकारी (DM) उमेश प्रताप सिंह जल निगम ग्रामीण की समीक्षा बैठक लेने उतरे, तो उनका तेवर साफ था—“लापरवाही किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं, गड़बड़ी मिली तो कड़ी कार्रवाई तय है!”

TargetTvLive की इस विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में जानिए बिजनौर की ‘हर घर योजना’ का पूरा रियलिटी चेक, प्रोजेक्ट्स का रिपोर्ट कार्ड और DM के वो सख्त निर्देश जिन्होंने जल निगम से लेकर ठेकेदारों की नींद उड़ा दी है।

(सांकेतिक चित्र: महात्मा विदुर सभागार में जल निगम ग्रामीण की समीक्षा बैठक करते DM उमेश प्रताप सिंह)

अंक गणित: 904 में से सिर्फ 321 पूरे, 583 प्रोजेक्ट्स पर अब भी संशय!

बैठक में जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता राकेश चौधरी ने जो आंकड़े पेश किए, वे योजना की जमीनी रफ्तार को बयां करते हैं:

  • कुल निर्धारित लक्ष्य: 904 पेयजल परियोजनाएं
  • पूर्ण हो चुकी परियोजनाएं: 321 (लगभग 35.5%)
  • प्रगति पर (अधूरी) परियोजनाएं: 583
  • नई डेडलाइन: मार्च 2027

TargetTvLive एनालिसिस: जिले के 1943 आबादी वाले गांवों को संतृप्त करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 1743 गांवों में ओवरहेड टैंक और डायरेक्ट पंपिंग से सप्लाई चालू होने का दावा किया गया है। लेकिन बाकी बचे 200 गांवों और 583 अधूरी परियोजनाओं को मार्च 2027 तक पूरा करना जिला प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।

दो कंपनियों के कंधों पर 1943 गांवों का बोझ

योजना के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी दो प्रमुख कार्यदायी संस्थाओं को सौंपी गई है:

  1. विंध्या टेलीलिंक लिमिटेड: 1,311 गांव
  2. एलसी इंफ्रा (LC Infra): 632 गांव

डीएम उमेश प्रताप सिंह ने इन दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों को सख्त चेतावनी दी है कि वे टाइमलाइन का सख्ती से पालन करें और पानी की टंकियों व पाइपलाइनों के निर्माण मानकों में कोई ढिलाई न बरतें।

टीम गठित कर होगा पानी की टंकियों का ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’

बैठक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला यह रहा कि डीएम ने अधिकारियों की विशेष टीमें गठित कर मौके पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराने का निर्देश दिया है।

  • गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं: अगर पानी की टंकी के निर्माण या सामग्री में जरा सी भी अनियमितता पाई गई, तो संबंधित फर्म और अधिकारियों पर सीधे FIR व रिकवरी जैसी कार्रवाई होगी।
  • थर्ड पार्टी जांच: पूरे प्रोजेक्ट के थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी ‘आरवी एसोसिएट्स’ को सौंपी गई है।
  • लैब टेस्टिंग: पेयजल की शुद्धता जांचने के लिए झालू स्थित जल निगम कार्यालय में आधुनिक प्रयोगशाला (Lab) स्थापित की गई है।

उखड़ी सड़कें बनीं आफत: 43 किलोमीटर का गड्ढा भरेगा एक हफ्ते में!

जल निगम द्वारा पाइपलाइन बिछाने के नाम पर जिले की सड़कों को खोदकर छोड़ देना लंबे समय से जनता के लिए मुसीबत बना हुआ था।

  • कुल क्षतिग्रस्त सड़क: 196 किलोमीटर
  • पुनर्स्थापित (रिपेयर) सड़क: 153 किलोमीटर
  • बकाया उखड़ी सड़क: 43 किलोमीटर

डीएम ने लोक निर्माण और जल निगम के अधिकारियों को अल्टीमेटम दिया है कि बाकी बची 43 किमी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत अगले 7 दिनों (एक सप्ताह) के भीतर हर हाल में पूरी की जाए।

बॉक्सा जनजातीय गांवों और बॉर्डर एरिया में राहत की बयार

समीक्षा में सामने आया कि जिले के दूरदराज और संवेदनशील इलाकों में भी काम पहुंचाया गया है:

  • बॉक्सा योजना: कोतवाली, नजीबाबाद और अफजलगढ़ ब्लॉक के 6 बुक्सा जनजातीय बहुल गांवों में काम पूरा कर जलापूर्ति शुरू कर दी गई है।
  • उत्तराखंड बॉर्डर: देवभूमि की सीमा से सटे बिजनौर के 18 गांवों में योजना का काम सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया है।
  • जन जागरूकता (ISA): जल संरक्षण और जन-जागरूकता के लिए आरएमई, सामुदायिक बाल विकास समिति, महिला उत्थान एवं ग्राम उद्योग विकास समिति और पीएस सेवा समिति जैसी 4 आईएसए (ISA) संस्थाएं धरातल पर काम कर रही हैं।

TargetTvLive टेकअवे: कथनी और करनी के बीच संतुलन ही सफलता की कुंजी

जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह के इस सख्त रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिजनौर में अब कागजी आंकड़ों से काम नहीं चलेगा। स्वच्छ पानी हर नागरिक का अधिकार है, और जब तक हर घर के नल से शुद्ध पेयजल नहीं टपकता, तब तक जल निगम और ठेकेदारों पर ‘टारगेट टीवी लाइव’ की नजर बनी रहेगी।

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