शामली के निजी अस्पताल में नवजात के उपचार पर सवाल, डॉ. शिखर गुप्ता ने आरोपों को बताया तथ्यहीन
पीड़ित ने वीडियो भेजकर पत्रकारों और संपादकों से मांगी सहायता; नर्सरी में भर्ती करने, उपचार की जानकारी और मेडिकल रिपोर्ट पर उठाए सवाल—अस्पताल प्रबंधन ने बताया बदनाम करने की साजिश
अवनीश त्यागी | Target TV Live
शामली। एक निजी अस्पताल में नवजात बच्चे के उपचार और उसे नर्सरी में भर्ती किए जाने को लेकर शिकायत सामने आई है। पीड़ित परिवार ने वीडियो के माध्यम से अपनी शिकायत रखते हुए पत्रकारों और संपादकों से सहायता मांगी है। शिकायतकर्ता ने बच्चे की स्थिति, उपचार के संबंध में जानकारी देने के तरीके और मेडिकल रिपोर्ट में कथित विसंगतियों को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, अस्पताल के चिकित्सक डॉ. शिखर गुप्ता ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को भ्रामक और तथ्यहीन बताते हुए इसे अस्पताल को बदनाम करने की साजिश करार दिया है।
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच मामले की निष्पक्ष जांच और चिकित्सा संबंधी अभिलेखों का परीक्षण महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, अभी तक इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नवजात को नर्सरी में भर्ती करने पर परिजनों ने उठाए सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके बेटे का जन्म 22 तारीख को हुआ था। उनका आरोप है कि डॉ. प्रियंका ने बच्चे की हालत गंभीर बताते हुए उसे नर्सरी में भर्ती कराया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें बच्चा सक्रिय दिखाई दे रहा था, इसलिए वे उसे नर्सरी में भर्ती किए जाने के चिकित्सकीय कारणों को लेकर सवाल कर रहे हैं।
परिवार का आरोप है कि लगभग दो दिनों तक बच्चे की स्थिति और उसे दिए जा रहे उपचार के संबंध में उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। शिकायतकर्ता ने मेडिकल रिपोर्ट में भी कुछ कथित विसंगतियां होने का संदेह जताया है।
हालांकि, नवजात को नर्सरी में भर्ती करने का निर्णय उसकी चिकित्सकीय स्थिति और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करता है। इसलिए यह निर्धारित करने के लिए कि भर्ती करना आवश्यक था या नहीं, बच्चे की मेडिकल फाइल और उपचार संबंधी रिकॉर्ड की विशेषज्ञ चिकित्सक से समीक्षा कराना जरूरी होगा।
नर्सरी के कर्मचारियों की कार्यशैली पर भी शिकायत
शिकायतकर्ता ने नर्सरी में कार्यरत कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ कर्मचारी ड्यूटी के दौरान धूम्रपान या पान-गुटखा सेवन करते हैं और स्वच्छता संबंधी सावधानियों का पर्याप्त पालन नहीं करते।
ये आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित हैं। इनकी पुष्टि के लिए अस्पताल की वास्तविक कार्यप्रणाली, संक्रमण नियंत्रण संबंधी नियमों, कर्मचारियों के आचरण और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक है।
नवजात शिशुओं की देखभाल में स्वच्छता और संक्रमण से बचाव की व्यवस्था विशेष महत्व रखती है। ऐसे में शिकायत में उठाए गए सवालों की जांच संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा की जा सकती है।
राजीव वशिष्ठ की भूमिका की भी जांच कराने की मांग
शिकायतकर्ता ने राजीव वशिष्ठ नामक व्यक्ति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बच्चे की स्थिति के संबंध में उनसे मिली जानकारी स्पष्ट और संतोषजनक नहीं थी। शिकायतकर्ता ने संबंधित व्यक्ति के सरकारी पद, अस्पताल में उसकी भूमिका और वहां उसकी ड्यूटी से जुड़े तथ्यों का सत्यापन कराने की मांग की है।
हालांकि, राजीव वशिष्ठ के पद और अस्पताल से संबंधित भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों का बयान लेना आवश्यक होगा।
डॉ. शिखर गुप्ता ने आरोपों को बताया भ्रामक और तथ्यहीन
दूसरी ओर, डॉ. शिखर गुप्ता ने शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। उनका कहना है कि शिकायत के माध्यम से उनके अस्पताल को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
डॉ. गुप्ता के इस बयान के बाद मामला दो परस्पर विरोधी पक्षों के दावों के रूप में सामने आया है। एक ओर शिकायतकर्ता ने नवजात के उपचार और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को खारिज किया है।
ऐसी स्थिति में केवल आरोप या उनका खंडन ही वास्तविक स्थिति तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है। मामले में उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, चिकित्सकीय निर्णयों और अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष समीक्षा से ही तथ्यों की पुष्टि हो सकती है।
डीएम और एसपी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से अस्पताल की व्यवस्था और उपचार संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण कराने की अपेक्षा जताई है।
शिकायत के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं—
- नवजात को नर्सरी में भर्ती करने के चिकित्सकीय आधार की जांच।
- भर्ती से लेकर छुट्टी तक की मेडिकल फाइल, जांच रिपोर्ट और उपचार संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा।
- चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका तथा उपलब्ध ड्यूटी रिकॉर्ड का परीक्षण।
- नर्सरी में स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण संबंधी व्यवस्थाओं की जांच।
- राजीव वशिष्ठ के पद और अस्पताल में उनकी भूमिका से जुड़े तथ्यों का सत्यापन।
- शिकायतकर्ता और अस्पताल प्रबंधन, दोनों के बयान लेकर साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालना।
यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही, नियमों का उल्लंघन या अन्य अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो जांच के निष्कर्षों से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सवाल आरोपों का नहीं, वास्तविक तथ्यों का है
नवजात के उपचार से जुड़ा मामला संवेदनशील है। इसमें शिकायतकर्ता की चिंताओं को गंभीरता से सुनना और अस्पताल प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देना, दोनों जरूरी हैं। किसी भी पक्ष के दावे को जांच से पहले अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
अब महत्वपूर्ण यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड की विशेषज्ञ समीक्षा कराएगा? क्या नर्सरी में भर्ती करने के चिकित्सकीय कारणों और उपचार की प्रक्रिया की जांच होगी? और क्या शिकायतकर्ता तथा अस्पताल प्रबंधन के दावों के बीच की स्थिति आधिकारिक जांच से स्पष्ट हो सकेगी?
इन सवालों के जवाब जांच और प्रमाणित तथ्यों से ही सामने आने चाहिए।
Target TV Live का पक्ष: समाचार में शिकायतकर्ता के आरोपों और डॉ. शिखर गुप्ता के खंडन, दोनों को शामिल किया गया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों की जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने पर ही मामले के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।












