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​27-28 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ा फैसला! आम जनता के लिए सस्ता होने जा रहा इलाज, जानें मोदी सरकार का मास्टर प्लान?

देश में अब हर मरीज को मिलेगा सस्ता और सटीक इलाज! दिल्ली में जुटेंगे दुनिया भर के दिग्गज, फिक्की हील 2026 में रचा जाएगा नया इतिहास

By अवनीश त्यागी | TargetTvLive 
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: देशभर में आम नागरिकों के बजट पर भारी पड़ते इलाज के खर्च और अस्पतालों में बेहतर सुविधाओं की कमी जैसे गंभीर मुद्दों को जड़ से खत्म करने के लिए भारत की राजधानी दिल्ली एक बड़े ऐतिहासिक मंथन की गवाह बनने जा रही है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) आगामी 27 और 28 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित फिक्की फेडरेशन हाउस में अपने प्रतिष्ठित वार्षिक स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन ‘फिक्की हील 2026’ (FICCI HEAL 2026) के 20वें संस्करण का भव्य आयोजन कर रहा है।

इस बार सम्मेलन का मुख्य विजन ‘HEAL@20: From Vision to Value’ तय किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा नीति आयोग के सीधे संरक्षण में आयोजित हो रहे इस दो दिवसीय महाकुंभ का उद्देश्य कागजी योजनाओं को धरातल पर उतारकर भारत को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी बनाना है।

विकसित भारत 2047: स्वास्थ्य सेवा में क्रांति का रोडमैप

इस उच्चस्तरीय बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण ‘विकसित भारत 2047’ के लिए तैयार होने वाला हेल्थकेयर एजेंडा है। नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर एम. श्रीनिवास सम्मेलन में मुख्य भाषण देंगे और देश-विदेश के दिग्गज सीईओ की विशेष नीति बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे, जिसका विषय ‘Healthcare@2047: Shaping India’s Health Agenda for Viksit Bharat’ रखा गया है।

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री और आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जी. जाधव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्णवाल, ICMR की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. अलका शर्मा और औषधि विभाग के संयुक्त सचिव अमन शर्मा समेत कई प्रशासनिक व चिकित्सा दिग्गज इसमें अपनी सहभागिता देंगे।

केवल अस्पताल बनाना काफी नहीं, सटीक इलाज जरूरी

स्वास्थ्य क्षेत्र में आ रहे बुनियादी बदलावों पर प्रकाश डालते हुए फिक्की स्वास्थ्य सेवा समिति के अध्यक्ष और फोर्टिस हेल्थकेयर के सीईओ डॉ. आशुतोष रघुवंशी ने कहा:

“आधुनिक भारत में केवल नई इमारतें या बिस्तरों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती और जिम्मेदारी यह है कि मरीज को कम लागत में कितना सटीक और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलता है।”

समिति के सह-अध्यक्ष वरुण खन्ना और डॉ. धर्मिंदर नगर ने भी इस बात पर जोर दिया कि नई तकनीकों और सरकारी-निजी साझेदारी (PPP Model) का मुख्य ध्येय यही होना चाहिए कि महंगे इलाज की पहुंच देश के अंतिम व्यक्ति तक आसान और किफायती बने।

डॉ. शशि थरूर प्रदान करेंगे ‘हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवार्ड्स’

सम्मेलन की पहली शाम बेहद खास होगी, जब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले संस्थानों और चिकित्सकों को सम्मानित करने के लिए ‘फिक्की हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस गरिमामय समारोह में तिरुवनंतपुरम से सांसद डॉ. शशि थरूर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे और विजेताओं को सम्मानित करेंगे।

उत्तर प्रदेश के ‘स्मार्ट आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ समेत 5 ऐतिहासिक रिपोर्ट होंगी जारी

सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की भावी दिशा तय करने वाली 5 महत्वपूर्ण शोध रिपोर्ट और अध्ययन जारी किए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • उत्तर प्रदेश की ग्राउंड रिपोर्ट: राज्य में ‘स्मार्ट आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ पहल की जमीनी सफलता और विस्तार का मॉडल।
  • डिजिटल हेल्थ: मरीजों के डेटा की सुरक्षा और टेलीमेडिसिन का विस्तार।
  • स्वच्छ हवा और जनस्वास्थ्य: प्रदूषण से निपटने के लिए स्वास्थ्य नीतियों का एकीकरण।
  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP): निजी और सरकारी अस्पतालों का मजबूत समन्वय।
  • हेल्थकेयर वर्कफोर्स: पैरामेडिकल स्टाफ व डॉक्टरों का कौशल विकास।

इसके अतिरिक्त, देशभर से आए मेडिकल छात्र, शोधकर्ता और हेल्थ-टेक स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व नई मेडिकल तकनीकों के जरिए स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान पर अपने क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत करेंगे।

TargetTvLive निष्पक्ष संपादकीय विश्लेषण: भारत का स्वास्थ्य ढांचा इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने गरीब तबके को सुरक्षा कवच जरूर दिया है, लेकिन मध्यम वर्ग के लिए आज भी निजी अस्पतालों का खर्च एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में ‘फिक्की हील 2026’ जैसे राष्ट्रीय मंच यदि नीतिगत बदलावों के जरिए निजी और सरकारी तंत्र के बीच एक पारदर्शी और किफायती मॉडल खड़ा कर पाते हैं, तो यह भारतीय जनस्वास्थ्य प्रणाली के लिए क्रांतिकारी मील का पत्थर साबित होगा।

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