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बिजनौर महिला जनसुनवाई: शिकायतें 120, समयसीमा 15 दिन—अब कार्रवाई के नतीजों पर नजर

बिजनौर में महिलाओं की आवाज बनी आयोग तक पहुंचने का बड़ा मंच, 120 शिकायतों पर 15 दिन में कार्रवाई के निर्देश

पोक्सो, दहेज और ससुराल में उत्पीड़न से लेकर पेंशन-आवास तक के मामले; तीन दंपतियों ने सुलझाया विवाद, साथ रहने पर बनी सहमति
अवनीश त्यागी TargetTvLive

बिजनौर, 10 सितंबर।
महिलाओं की शिकायतों और उनकी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर गुरुवार को बिजनौर में हुई राष्ट्रीय महिला आयोग की जनसुनवाई में समस्याओं का बड़ा फलक सामने आया। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजय रहाटकर की मौजूदगी में विकास भवन सभागार में हुई सुनवाई में कुल 120 शिकायतें सामने आईं। इनमें पूर्व में चिन्हित 30 और नई 90 शिकायतें शामिल रहीं।

शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को प्रत्येक मामले की जांच कर 15 दिन के भीतर नियमानुसार, गुणवत्तापरक और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए। अब इस जनसुनवाई की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि शिकायतों पर कार्रवाई कितनी प्रभावी और निष्पक्ष तरीके से होती है।

120 शिकायतों में दिखी महिलाओं की समस्याओं की अलग-अलग तस्वीर

जनसुनवाई में सामने आए मामलों में पोक्सो एक्ट, दहेज उत्पीड़न, ससुराल में उत्पीड़न, पेंशन और आवास जैसी शिकायतें प्रमुख रहीं।

इन मामलों की प्रकृति यह बताती है कि महिलाओं की समस्याएं किसी एक स्तर तक सीमित नहीं हैं। एक तरफ गंभीर आपराधिक एवं पारिवारिक उत्पीड़न के मामले हैं, तो दूसरी ओर सामाजिक सुरक्षा और आवास जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़े मामले भी हैं।

हालांकि, जनसुनवाई में दर्ज शिकायतें अभी शिकायत के स्तर पर हैं। इनमें लगाए गए आरोपों की सत्यता संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए प्रत्येक मामले में निष्पक्ष जांच और तथ्यपरक कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण होगी।

15 दिन की समयसीमा बनी जनसुनवाई का सबसे अहम बिंदु

आयोग की अध्यक्ष ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनने तथा नियमों के अनुरूप गुणवत्तापरक और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

15 दिन की समयसीमा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायत दर्ज होने के बाद कार्रवाई की गति ही पीड़ित महिला के भरोसे को मजबूत करती है। विशेष रूप से पोक्सो और उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों में देरी शिकायतकर्ता के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि निर्धारित समय में कितने मामलों की जांच पूरी होती है और शिकायतकर्ताओं को वास्तविक राहत कितनी मिलती है।

तीन दंपतियों ने विवाद सुलझाया, साथ रहने पर जताई सहमति

जनसुनवाई के दौरान एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई। तीन दंपतियों ने आपसी मनमुटाव को सुलझाते हुए साथ-साथ रहने पर सहमति जताई।

यह पहल इस मायने में महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक पारिवारिक विवाद का समाधान केवल कानूनी कार्रवाई से ही नहीं होता। जहां दोनों पक्ष सहमत हों और महिला की सुरक्षा एवं स्वतंत्र इच्छा सुनिश्चित हो, वहां संवाद और आपसी सहमति भी परिवार को टूटने से बचाने का माध्यम बन सकती है।

महिलाओं से कहा—उत्पीड़न सहन न करें, शिकायत करें

विजय रहाटकर ने महिलाओं से स्पष्ट रूप से कहा कि वे अपने ऊपर होने वाले उत्पीड़न को सहन न करें और इसकी शिकायत करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राष्ट्रीय महिला आयोग महिलाओं की समस्याओं के समाधान में उनके साथ है।

उन्होंने महिलाओं से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने आर्थिक और सामाजिक उत्थान की दिशा में आगे बढ़ने का भी आह्वान किया।

यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अधिकारों और योजनाओं की जानकारी का अभाव कई बार महिलाओं को उपलब्ध सहायता तक पहुंचने से रोक देता है।

जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने जिलाधिकारी जसजीत कौर के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा जनसुनवाई के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।

इस दौरान जिलाधिकारी जसजीत कौर सहित पुलिस एवं प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

TargetTvLive विश्लेषण: शिकायतों की संख्या से ज्यादा अहम होगा उनका परिणाम

बिजनौर की इस जनसुनवाई में 120 शिकायतों का सामने आना अपने आप में महत्वपूर्ण आंकड़ा है, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण अब इन शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई होगी।

जनसुनवाई किसी भी व्यवस्था की पहली सीढ़ी है। शिकायत दर्ज होना जरूरी है, लेकिन उससे आगे की प्रक्रिया—जांच, जिम्मेदारी तय करना, समयबद्ध कार्रवाई और पीड़ित को राहत—ही व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता तय करती है।

विशेष रूप से पोक्सो, दहेज उत्पीड़न और ससुराल में उत्पीड़न से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कानून के मुताबिक कार्रवाई आवश्यक है। वहीं पेंशन और आवास से जुड़ी शिकायतों में यह देखना होगा कि पात्रता के बावजूद यदि कोई समस्या है तो उसका समाधान कितनी जल्दी होता है।

15 दिन की समयसीमा अब प्रशासन के लिए एक स्पष्ट कार्य-लक्ष्य है। यदि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक सीमित न रहकर शिकायतकर्ताओं को वास्तविक राहत तक पहुंचता है, तो ऐसी जनसुनवाई महिलाओं के भरोसे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

TargetTvLive के लिए इस जनसुनवाई का सबसे अहम सवाल यही है—120 शिकायतों में से कितनी शिकायतों का समाधान वास्तव में 15 दिन के भीतर जमीन पर दिखाई देगा? इसका जवाब ही इस पूरी कवायद की असली सफलता तय करेगा।

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