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आयुष्मान इलाज पर विवाद गरमाया: शिकायत के डेढ़ माह बाद भी कार्रवाई नहीं, भारतीय किसान यूनियन ने CMO कार्यालय घेरा

बिजनौर में आयुष्मान इलाज पर विवाद गरमाया: शिकायत के डेढ़ माह बाद भी कार्रवाई नहीं, भारतीय किसान यूनियन ने CMO कार्यालय घेरा

हाथ की हड्डी का ऑपरेशन बिगड़ने और ₹51,100 लेने के आरोपों पर भड़का किसान संगठन, कार्रवाई की मांग को लेकर CMO कार्यालय पर प्रदर्शन

बिजनौर। सड़क हादसे में घायल मरीज के हाथ की हड्डी का ऑपरेशन होने के बाद भी हड्डी नहीं जुड़ने और आयुष्मान कार्ड से उपचार के बावजूद कथित तौर पर ₹51,100 लिए जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायत किए जाने के डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद समुचित कार्रवाई अमल में नहीं आने से नाराज भारतीय किसान यूनियन (देव शक्ति) ने अब मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने सीएमओ कार्यालय का घेराव शुरू कर दिया है।

Target TV Live के लिए अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ी स्थिति, अस्पताल पर गंभीर आरोप

मामला ग्राम रानीपुर, थाना नजीबाबाद निवासी आकाश कुमार पुत्र महेंद्र सिंह से जुड़ा है। शिकायती पत्र के अनुसार सड़क दुर्घटना में उनके दाहिने हाथ की हड्डी टूट गई थी। इसके बाद उनका ऑपरेशन मंडावर रोड स्थित श्री साईं हॉस्पिटल, बिजनौर में कराया गया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि ऑपरेशन के करीब दो माह बाद भी हाथ की हड्डी ठीक से नहीं जुड़ी और दोबारा जांच में स्थिति और खराब मिलने की बात सामने आई। मरीज द्वारा अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक से समस्या बताने पर कथित रूप से संतोषजनक उपचार अथवा समाधान नहीं दिया गया।

मामले में चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की अभी विभागीय जांच होना बाकी है।

आयुष्मान कार्ड के बावजूद ₹51,100 लेने का आरोप

शिकायत में उपचार के दौरान धनराशि लिए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। मरीज पक्ष का दावा है कि आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार होने के बावजूद उससे ₹30 हजार नकद लिए गए। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड के जरिए ₹21,100 की राशि भी ली गई।

शिकायतकर्ता के मुताबिक कुल राशि ₹51,100 बैठती है। यही आरोप अब पूरे मामले का सबसे अहम बिंदु बन गया है और किसान संगठन स्वास्थ्य विभाग से इसका स्पष्ट जवाब मांग रहा है।

डेढ़ माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने से बढ़ा आक्रोश

मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन (देव शक्ति) की ओर से सीएमओ कार्यालय में शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की गई थी। संगठन का आरोप है कि शिकायत को डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक कोई समुचित कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।

संगठन का कहना है कि यदि शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती तो सीएमओ कार्यालय का घेराव करने की स्थिति नहीं आती। कार्रवाई में कथित देरी से नाराज संगठन ने अब सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन और घेराव शुरू कर दिया है।

किसान यूनियन के प्रदर्शन से स्वास्थ्य विभाग पर दबाव

भारतीय किसान यूनियन (देव शक्ति) की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित अस्पताल और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

संगठन का जोर इस बात पर है कि मरीज के उपचार से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड, एक्स-रे, ऑपरेशन रिपोर्ट, अस्पताल के बिल, आयुष्मान क्लेम और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

अब जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी

◆ आयुष्मान कार्ड से उपचार के बावजूद ₹30 हजार नकद क्यों लिए गए?
◆ ₹21,100 का आयुष्मान क्लेम किस उपचार के नाम पर किया गया?
◆ नकद भुगतान की कोई रसीद या बिल मरीज को दिया गया था या नहीं?
◆ ऑपरेशन के बाद हड्डी नहीं जुड़ने की वजह क्या रही?
◆ क्या उपचार निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप किया गया था?
◆ शिकायत मिलने के बाद डेढ़ माह तक कार्रवाई क्यों लंबित रही?

इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही

इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मरीज और किसान संगठन की ओर से लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। इन्हें अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। अस्पताल और संबंधित चिकित्सक का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

लेकिन शिकायत के बाद लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के आरोप ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर जरूर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सीएमओ कार्यालय के घेराव के बाद देखना होगा कि विभाग मामले की जांच को कितनी गंभीरता से आगे बढ़ाता है और मरीज द्वारा लगाए गए आरोपों का तथ्यात्मक समाधान कब तक सामने आता है।

‘कार्रवाई नहीं तो आंदोलन जारी’

किसान संगठन के रुख से साफ है कि मामला अब केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रहा। समुचित कार्रवाई की मांग को लेकर सीएमओ कार्यालय का घेराव शुरू हो चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती शिकायत की जांच कराने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों को संतुष्ट करने और पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखने की भी है।

Target TV Live इस मामले से जुड़े घटनाक्रम और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर लगातार नजर बनाए हुए है।

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी

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