तिरंगा हाथ में, पर्यावरण बचाने का संकल्प और नशे के खिलाफ हुंकार! गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में युवाओं का अनूठा अभियान

मुरादाबाद। राष्ट्रप्रेम जब सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ता है तो उसका प्रभाव कहीं अधिक व्यापक हो जाता है। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद में बुधवार को कुछ ऐसा ही देखने को मिला। यहां तिरंगा यात्रा के जरिए देशभक्ति की भावना को पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और नशा मुक्ति के संकल्प से जोड़ा गया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने तिरंगा हाथ में लेकर न केवल राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया, बल्कि नुक्कड़ नाटक, स्लोगन और स्किट के जरिए समाज के सामने उन चुनौतियों को भी रखा, जिनका सीधा संबंध आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से है।
तिरंगे के साथ निकली जागरूकता की यात्रा
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित तिरंगा यात्रा का नेतृत्व कुलपति प्रो. (डॉ.) सचिन माहेश्वरी, कुलसचिव डॉ. गिरीश द्विवेदी और पर्यावरण नोडल अधिकारी डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने किया।
विभिन्न संकायों के शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए। हाथों में लहराता तिरंगा और देशभक्ति के नारों के बीच निकली यात्रा ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रप्रेम केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित रहने वाली भावना नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और युवा पीढ़ी के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प भी है।
नुक्कड़ नाटक ने पूछा—विकास चाहिए, लेकिन किस कीमत पर?
तिरंगा यात्रा के बाद विद्यार्थियों ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट और पर्यावरण संरक्षण पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया।
नाटक ने विकास की दौड़ में पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने के सवाल को केंद्र में रखा। विद्यार्थियों ने बताया कि आधुनिक विकास के साथ प्रकृति का संरक्षण भी जरूरी है और छोटे-छोटे पर्यावरण अनुकूल विकल्प भविष्य में बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।
अरमान खान, छवि द्विवेदी, निपेन्द्र, नीलम, दीक्षा शर्मा, कनिका कुमारी और प्रियंका ने अभिनय के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
‘इको मित्रम’ ऐप: जागरूकता को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम में पर्यावरण नोडल अधिकारी डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने राष्ट्रीय हरित कोर/पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को ‘इको मित्रम’ ऐप के उद्देश्य और उपयोगिता के बारे में बताया।
उन्होंने विद्यार्थियों से 15 सितंबर 2026 की अंतिम तिथि से पहले पंजीकरण कराने का आह्वान किया। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना है।
सीड बॉम्ब से बंजर जमीन पर हरियाली की उम्मीद
पर्यावरण संरक्षण की चर्चा को केवल भाषण तक सीमित नहीं रखा गया। विद्यार्थियों को ‘सीड बॉम्ब’ तकनीक की जानकारी दी गई।
बंजर और कम हरित क्षेत्रों में बीज पहुंचाकर प्राकृतिक हरियाली विकसित करने की इस तकनीक के व्यावहारिक पहलुओं को समझाया गया। संदेश साफ था—हरियाली बढ़ाने के लिए केवल बड़े पौधारोपण अभियानों का इंतजार करने के बजाय स्थानीय स्तर पर भी छोटे-छोटे प्रयोग किए जा सकते हैं।
नशे के खिलाफ छात्रों की बुलंद आवाज
कार्यक्रम का सबसे संवेदनशील और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा नशा मुक्ति जागरूकता अभियान रहा।
विद्यार्थियों ने प्रभावशाली स्लोगन और सामाजिक स्किट के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को सामने रखा। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपनी ऊर्जा को शिक्षा, खेल तथा रचनात्मक गतिविधियों में लगाने का संदेश दिया।
यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि युवा सोच और सामाजिक चेतना को दिशा देने वाले संस्थान भी हैं।
विश्लेषण: कार्यक्रम की असली सफलता नारों से आगे होगी
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय का यह आयोजन तीन महत्वपूर्ण मुद्दों—राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण और नशा मुक्ति—को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में सामने आया।
लेकिन इसकी असली सफलता इस बात से तय होगी कि जागरूकता का यह संदेश विद्यार्थियों के व्यवहार में कितना उतरता है। यदि ‘इको मित्रम’ जैसे डिजिटल माध्यमों के साथ नियमित पर्यावरणीय गतिविधियां, सीड बॉम्ब से हरित क्षेत्र विकसित करने के प्रयोग और नशे के खिलाफ निरंतर संवाद को संस्थागत रूप दिया जाता है, तो ऐसे कार्यक्रम महज एक दिन का आयोजन न रहकर दीर्घकालिक सामाजिक अभियान बन सकते हैं।
युवाओं को केवल पर्यावरण बचाने का संदेश देना पर्याप्त नहीं है; उन्हें पर्यावरण संरक्षण का सक्रिय भागीदार बनाना होगा। इसी तरह नशे के खिलाफ नारे लगाने के साथ परामर्श, जागरूकता और निरंतर सामाजिक संवाद भी जरूरी है।
कुलपति ने बताया विश्वविद्यालयों की बड़ी जिम्मेदारी
कुलपति प्रो. (डॉ.) सचिन माहेश्वरी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण सुरक्षा और नशामुक्त समाज का निर्माण किसी भी शैक्षणिक संस्थान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कुलसचिव डॉ. गिरीश द्विवेदी ने पर्यावरण जागरूकता को डिजिटल और व्यावहारिक माध्यमों से विद्यार्थियों से जोड़ने की पहल की सराहना की।
कार्यक्रम में डॉ. अदीबा खान, डॉ. सचिन शर्मा, डॉ. यशी (भूगोल विभाग) समेत विभिन्न विभागों के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
एक यात्रा, तीन बड़े संदेश
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय की यह तिरंगा यात्रा अपने पीछे तीन स्पष्ट संदेश छोड़ गई—
देश के प्रति जिम्मेदारी, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प।
अब जरूरत इस बात की है कि इन संदेशों को कार्यक्रम की तस्वीरों और नारों से आगे ले जाकर विद्यार्थियों की रोजमर्रा की जिंदगी और समाज की सामूहिक आदतों का हिस्सा बनाया जाए।
TargetTvLive | विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी












