Target Tv Live

नगीना में खनन पट्टों की ई-निविदा में लगी हजारों की बोली, अब भू-स्वामियों के फैसले पर टिकी आगे की कार्रवाई

नगीना में खनन पट्टों की ई-निविदा में लगी हजारों की बोली, अब भू-स्वामियों के फैसले पर टिकी आगे की कार्रवाई

2.277 हेक्टेयर क्षेत्र में उपखनिज निकासी के लिए खुली ई-निविदा, दो फर्मों ने लगाई सर्वाधिक बोली; सात दिन में भू-स्वामियों को करना होगा अधिकार का इस्तेमाल

बिजनौर। नगीना तहसील क्षेत्र में उपखनिज निकासी को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दो अलग-अलग क्षेत्रों में उपखनिज निकासी के लिए हुई ई-निविदा में सर्वाधिक बोली आने के बाद जिलाधिकारी ने दोनों निविदाओं को स्वीकृति दे दी है। अब संबंधित भू-स्वामियों को सात दिन के भीतर यह तय करना होगा कि वे चयनित सर्वोच्च निविदादाता से अधिक धनराशि की बोली प्राप्त कराते हैं अथवा नियमों के तहत अपने प्रथम इनकार के अधिकार का इस्तेमाल करते हैं।

रिपोर्ट। अवनीश त्यागी | TargetTvLive

दो क्षेत्रों में खुली ई-निविदा, 2.277 हेक्टेयर जमीन शामिल

जिलाधिकारी कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली-2019 यथासंशोधित के प्रावधानों के तहत नगीना तहसील के ग्राम अब्दुलफजलपुर पहाड़ा और शाहउलीपुर कोटरा में एकत्रित उपखनिजों की निकासी के लिए 17 अगस्त 2026 को संयुक्त समिति के सदस्यों की उपस्थिति में ई-निविदाएं खोली गईं।

अब्दुलफजलपुर पहाड़ा में गाटा संख्या 70 की 1.265 हेक्टेयर भूमि और शाहउलीपुर कोटरा में गाटा संख्या 2/40/14 तथा 2/40/16 की कुल 1.012 हेक्टेयर भूमि इस प्रक्रिया में शामिल है। यानी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल 2.277 हेक्टेयर क्षेत्र में उपखनिज निकासी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।

किसने कितनी लगाई बोली?

ई-निविदा में दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग फर्मों की सर्वाधिक बोली सामने आई।

– अब्दुलफजलपुर पहाड़ा: मेसर्स प्रताप कंस्ट्रक्शन, बलिया — 3,728 रुपये प्रति घनमीटर
– शाहउलीपुर कोटरा: मेसर्स नवभारत कंस्ट्रक्शन, गोंडा — 3,828 रुपये प्रति घनमीटर

प्रशासन ने प्राप्त सर्वाधिक बोलियों को स्वीकार करते हुए दोनों निविदाओं को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

असली पेच अब भू-स्वामियों के अधिकार पर

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सिर्फ सर्वाधिक बोली लगना नहीं, बल्कि इसके बाद की प्रक्रिया है। शासनादेश दिनांक 30 अगस्त 2019 में निर्धारित प्रावधानों के तहत संबंधित भू-स्वामियों को चयनित सर्वोच्च निविदादाता से अधिक धनराशि की बोली प्राप्त कराने अथवा प्रथम इनकार के अधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर दिया गया है।

इसके लिए प्रशासन की ओर से 19 अगस्त 2026 को कार्यालय पत्र भेजकर संबंधित भू-स्वामियों को सात दिन के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का अवसर दिया गया है। निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर संबंधित क्षेत्र को परिहार पर दिए जाने के लिए अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।

विश्लेषण: बोली से आगे अब पारदर्शिता की परीक्षा

देखा जाए तो ई-निविदा प्रक्रिया ने उपखनिज निकासी के लिए प्रतिस्पर्धी बोली का रास्ता खोला है। दो क्षेत्रों में अलग-अलग फर्मों की सर्वाधिक बोली सामने आना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया की वास्तविक कसौटी अब आगे है।

सात दिन की समयसीमा में भू-स्वामी क्या निर्णय लेते हैं, क्या कोई अधिक बोली सामने आती है और अंततः किन शर्तों पर उपखनिज निकासी का अधिकार दिया जाता है—ये सभी बिंदु आगे की प्रक्रिया को प्रभावित करेंगे।

खास बात यह है कि प्रशासन ने भू-स्वामियों को उनके अधिकार के इस्तेमाल का स्पष्ट अवसर दिया है। ऐसे में आगे की कार्रवाई नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होती है या नहीं, इस पर स्थानीय स्तर पर स्वाभाविक रूप से नजर रहेगी।

2.277 हेक्टेयर क्षेत्र पर अब अगला कदम क्या?

फिलहाल प्रशासन ने ई-निविदाओं को मंजूरी दे दी है, लेकिन संबंधित क्षेत्रों को अंतिम रूप से परिहार पर दिए जाने की कार्रवाई भू-स्वामियों के लिए निर्धारित सात दिन की अवधि और उसके बाद की प्रक्रिया से जुड़ी है।

अर्थात ई-निविदा में सर्वाधिक बोली लगना अंतिम पड़ाव नहीं है, बल्कि यह पूरी प्रक्रिया के अगले चरण की शुरुआत है। अब प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज प्रक्रिया के अनुसार भू-स्वामियों के अधिकार, समयसीमा और उसके बाद होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

क्या है पूरा मामला—एक नजर में

स्थान: नगीना तहसील, बिजनौर
कुल क्षेत्रफल: 2.277 हेक्टेयर
पहला क्षेत्र: अब्दुलफजलपुर पहाड़ा, गाटा संख्या 70 — 1.265 हेक्टेयर
सर्वाधिक बोली: 3,728 रुपये प्रति घनमीटर
सर्वाधिक बोलीदाता: मेसर्स प्रताप कंस्ट्रक्शन, बलिया
दूसरा क्षेत्र: शाहउलीपुर कोटरा, गाटा संख्या 2/40/14 व 2/40/16 — 1.012 हेक्टेयर
सर्वाधिक बोली: 3,828 रुपये प्रति घनमीटर
सर्वाधिक बोलीदाता: मेसर्स नवभारत कंस्ट्रक्शन, गोंडा
अगला चरण: भू-स्वामियों को सात दिन में निर्धारित अधिकार का प्रयोग करना होगा।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध प्रशासनिक प्रेस विज्ञप्ति में दर्ज तथ्यों और प्रक्रिया पर आधारित है। विज्ञप्ति में उपखनिज की मात्रा, संभावित कुल राजस्व अथवा पर्यावरणीय अनुमति से संबंधित अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इनके संबंध में कोई अतिरिक्त दावा नहीं किया गया है।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें