CM Dashboard में गिरावट से हड़कंप: बिजनौर में DM का बड़ा एक्शन—तीन विभाग निशाने पर, शासन को जाएगी रिपोर्ट!
बिजनौर | 21 अप्रैल 2026 | TargetTvLive | अवनीश त्यागी
बिजनौर में प्रशासनिक सुस्ती अब सीधे कार्रवाई की दहलीज पर पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर लगातार गिरती रैंकिंग ने जिले की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी को लेकर जिलाधिकारी जसजीत कौर ने समीक्षा बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संकेत दे दिए हैं कि अब “ढिलाई नहीं, जवाबदेही” का दौर शुरू हो चुका है।
DM का एक्शन मोड: अब सीधे शासन तक जाएगी रिपोर्ट
समीक्षा के दौरान खराब प्रदर्शन करने वाले विभागों पर जिलाधिकारी का गुस्सा साफ दिखाई दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- जिला समाज कल्याण अधिकारी
- अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग (PWD)
- मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)
के खिलाफ विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। यह सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई की मजबूत शुरुआत मानी जा रही है।
रैंकिंग में गिरावट: B, C और D ग्रेड में फिसला जिला
सीएम डैशबोर्ड पर बिजनौर के कई विभागों का प्रदर्शन बेहद कमजोर पाया गया है।
विश्लेषण में सामने आया कि:
- कई योजनाएं तय समय सीमा से पीछे चल रही हैं
- फील्ड लेवल पर मॉनिटरिंग लगभग निष्क्रिय है
- डेटा फीडिंग और प्रोग्रेस अपडेट में भारी लापरवाही
इसी कारण जिले को B, C और D श्रेणियों में स्थान मिला, जो प्रशासनिक अक्षमता का स्पष्ट संकेत है।
सख्त चेतावनी: “अब सुधार नहीं किया तो कार्रवाई तय”
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए:
“सीएम डैशबोर्ड सरकार की प्राथमिकताओं का आईना है। इसमें खराब प्रदर्शन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारी इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखें।”
उन्होंने यह भी कहा कि:
- हर विभाग रोजाना डैशबोर्ड की समीक्षा करे
- कमजोर बिंदुओं की पहचान कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए
- किसी भी स्तर पर समस्या होने पर तुरंत उच्च स्तर पर अवगत कराएं
गहराई से समझें: क्यों बढ़ी सख्ती?
विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्यमंत्री डैशबोर्ड अब सिर्फ आंकड़ों का प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि रियल-टाइम गवर्नेंस टूल बन चुका है।
- यहां हर योजना की लाइव प्रगति ट्रैक होती है
- अधिकारियों की कार्यकुशलता सीधे मापी जाती है
- और खराब प्रदर्शन पर तत्काल जवाबदेही तय होती है
ऐसे में बिजनौर की गिरती रैंकिंग ने शासन स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।
कहां हो रही चूक? (ग्राउंड रिपोर्ट)
सूत्रों के अनुसार जिले में कई स्तरों पर खामियां सामने आ रही हैं:
- योजनाओं के क्रियान्वयन में विभागों के बीच समन्वय की कमी
- फील्ड अधिकारियों द्वारा निरीक्षण में ढिलाई
- लाभार्थी योजनाओं में सत्यापन और अपडेट की धीमी प्रक्रिया
- समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण के बावजूद पालन में कमी
बैठक में मौजूद रहे प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में:
- मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह
- डीएफओ जय सिंह कुशवाहा
- उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम सिंह
- जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी लक्ष्मी देवी
सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनके सामने DM ने साफ संदेश दिया कि अब परिणाम चाहिए, बहाने नहीं।
आगे की रणनीति: सुधार या सख्त कार्रवाई?
अब प्रशासन ने संकेत दे दिए हैं कि:
- कमजोर विभागों की साप्ताहिक मॉनिटरिंग होगी
- लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली लागू की जाएगी
- लापरवाही पर सीधी जवाबदेही तय होगी
अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो कई और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
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निष्कर्ष:
बिजनौर में प्रशासनिक सिस्टम अब निर्णायक मोड़ पर है।
जिलाधिकारी का सख्त रुख साफ कर रहा है कि अब “काम करो या परिणाम भुगतो” की नीति लागू हो चुकी है।
आने वाले दिनों में यह एक्शन जिले की रैंकिंग सुधारता है या और बड़े प्रशासनिक बदलाव लाता है — इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।












