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गंगा, जंगल और जनता पर फोकस: बिजनौर में DM का मास्टर प्लान, पर्यावरण को लेकर बड़े फैसले

गंगा, जंगल और जनता पर फोकस: बिजनौर में DM का मास्टर प्लान, पर्यावरण को लेकर बड़े फैसले

✍️ अवनीश त्यागी | TargetTvLive स्पेशल रिपोर्ट

बिजनौर, 21 अप्रैल 2026। जिले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए गए।

वृक्षारोपण के लिए ‘मास्टर प्लान’: हर गांव में बनेंगे छोटे वन

जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि बड़े भूमि क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें वन विभाग को तत्काल उपलब्ध कराया जाए। खास बात यह है कि अब हर गांव में ‘मिनी फॉरेस्ट’ (छोटे वन) विकसित करने की योजना पर जोर दिया गया है, जिससे पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिले।

👉 गंगा और अन्य नदियों के किनारे भी वृक्षारोपण के लिए जमीन चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नदी तटों का संरक्षण हो सके।

मालन नदी से अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम

बैठक में मालन नदी के प्रवाह को लेकर भी सख्ती दिखाई गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नदी के अतिक्रमण वाले क्षेत्रों की निशानदेही कर तत्काल हटाने की कार्रवाई की जाए।

👉 प्रशासन का मानना है कि अतिक्रमण हटने से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बहाल होगा और बाढ़ जैसी समस्याओं में कमी आएगी।

गंगा में गंदा पानी डालने पर लगेगी रोक

गंगा समिति की बैठक में एक बड़ा फैसला लेते हुए डीएम ने निर्देश दिए कि ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल के गांव बादशाहपुर, दयालपुर समेत अन्य क्षेत्रों के नालों का पानी गंगा में जाने से रोका जाए।

👉 यह कदम गंगा जल की स्वच्छता बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

वायु प्रदूषण पर ‘जीरो टॉलरेंस’: चालान और जुर्माने बढ़ेंगे

पर्यावरण समिति की समीक्षा के दौरान डीएम ने साफ कहा कि वायु प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

✔️ चालानों की संख्या बढ़ेगी
✔️ भारी जुर्माना लगाया जाएगा
✔️ निगरानी व्यवस्था और सख्त होगी

बायो मेडिकल वेस्ट पर सख्ती: बिना बारकोड नहीं होगा निस्तारण

अस्पतालों में निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को लेकर भी प्रशासन गंभीर दिखा। डीएम ने निर्देश दिए कि:

👉 सभी अस्पतालों में 100% बारकोड सिस्टम लागू हो
👉 बारकोड के आधार पर ही कचरे का निस्तारण किया जाए

यह कदम स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुलदार (तेंदुआ) से निपटने के लिए एक्शन प्लान

मानव-गुलदार संघर्ष को लेकर भी बैठक में अहम निर्णय लिए गए:

✔️ संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता कैंप आयोजित होंगे
✔️ वन विभाग और पंचायत राज विभाग मिलकर टीमें गठित करेंगे
✔️ प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाए जाएंगे
✔️ सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होगा

👉 प्रशासन का फोकस है कि किसी भी प्रकार की जनहानि न हो और वन्यजीवों की सुरक्षा भी बनी रहे।

विश्लेषण: क्यों अहम है यह बैठक?

यह बैठक केवल औपचारिक समीक्षा नहीं, बल्कि जिले में पर्यावरण गवर्नेंस का रोडमैप मानी जा रही है।

मुख्य संकेत:

  • प्रशासन अब प्रोएक्टिव (पहले से तैयार) मोड में
  • नदी, जंगल और शहर—तीनों स्तर पर समग्र योजना
  • कानून उल्लंघन पर सख्ती का स्पष्ट संदेश
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर ग्राउंड-लेवल एक्शन

👉 अगर इन निर्देशों का सही क्रियान्वयन होता है, तो बिजनौर ग्रीन और क्लीन मॉडल जिला बन सकता है।

बैठक में मौजूद प्रमुख अधिकारी

इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी रण विजय सिंह, डीएफओ जय सिंह कुशवाहा, उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम सिंह सहित कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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