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“जहां कब्जा, वहीं खालिद पर कार्रवाई” बिजनौर में प्रशासन का सख्त संदेश, अवैध बाउंड्री ध्वस्त

“रास्ता घेरा तो सीधा एक्शन!”,बिजनौर में 458 वर्गमीटर कब्जा ध्वस्त, प्रशासन ने मौके पर दिखाया दम

चकबंदी रिकॉर्ड से खुली पोल, राजस्व-चकबंदी टीम की संयुक्त कार्रवाई से अवैध बाउंड्री ध्वस्त
✍️ अवनीश त्यागी | TargetTvLive स्पेशल रिपोर्ट

बिजनौर: जहां रास्ता दबाया, वहीं चला प्रशासन का डंडा

बिजनौर में सरकारी रास्ते पर कब्जा करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने ऐसा त्वरित और सख्त एक्शन लिया है, जिसने पूरे इलाके में संदेश दे दिया—“अब सार्वजनिक जमीन पर कब्जा नहीं चलेगा”
चकबंदी प्रक्रिया के बीच सामने आए इस बड़े अतिक्रमण पर राजस्व और चकबंदी विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर न सिर्फ सच्चाई उजागर की, बल्कि तत्काल कब्जा भी हटवा दिया।

चकबंदी अभिलेख ने खोली साजिश की परतें

मामला ग्राम कस्बा बिजनौर का है, जहां चांदपुर रोड स्थित:

  • गाटा संख्या 3264/1 (0.0480 हेक्टेयर)
  • गाटा संख्या 3209 (0.1140 हेक्टेयर)

👉 ये दोनों जमीनें चकबंदी रिकॉर्ड में सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज हैं।

लेकिन पैमाइश में जो सामने आया, उसने प्रशासन को भी चौंका दिया—

  • गाटा 3263 (खालिद पुत्र ताहिर हुसैन) में बाउंड्री बनाते समय
    रास्ते की जमीन 3264/1 पर 304 वर्गमीटर कब्जा
  • गाटा 3210 में निर्माण के दौरान
    रास्ते की जमीन 3209 पर 154 वर्गमीटर अतिक्रमण

कुल कब्जा: 458 वर्गमीटर—यानी एक बड़े प्लॉट जितनी सरकारी जमीन हड़पी गई!

मौके पर ही टूटी बाउंड्री, हटाया गया पूरा कब्जा

जैसे ही रिपोर्ट स्पष्ट हुई, प्रशासन ने देरी नहीं की।
👉 चकबंदी + राजस्व टीम ने संयुक्त रूप से मौके पर पहुंचकर:

  • अवैध बाउंड्री को तोड़ा
  • रास्ते से पूरा अतिक्रमण हटवाया
  • जमीन को पुनः सार्वजनिक उपयोग के लिए मुक्त कराया

यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी अभिलेखों और पैमाइश के आधार पर की गई, जिससे किसी भी विवाद की गुंजाइश खत्म हो गई।

गांव में खुला रास्ता, लोगों ने ली राहत की सांस

लंबे समय से रास्ता घिर जाने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था—

  • आवागमन बाधित
  • खेतों तक पहुंच मुश्किल
  • रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित

👉 अतिक्रमण हटते ही गांव में फिर से रास्ता खुल गया और लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत किया।

ग्राउंड एनालिसिस: क्यों अहम है यह कार्रवाई?

बिजनौर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में चकबंदी के दौरान अक्सर ऐसी स्थिति सामने आती है, जहां:

  • प्रभावशाली लोग रास्तों और सार्वजनिक जमीनों पर कब्जा कर लेते हैं
  • छोटे किसान और ग्रामीण सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं
  • विवाद बढ़कर कानून-व्यवस्था की समस्या बन जाते हैं

👉 ऐसे में यह कार्रवाई एक मिसाल है कि यदि रिकॉर्ड मजबूत हो और प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए, तो अवैध कब्जे मिनटों में हट सकते हैं।

प्रशासन का अल्टीमेट संदेश

  • सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा = सीधी कार्रवाई
  • चकबंदी रिकॉर्ड सर्वोपरि
  • बिना नोटिस भी हो सकता है तत्काल एक्शन

TargetTvLive की अपील

यदि आपके क्षेत्र में भी सार्वजनिक जमीन या रास्तों पर अवैध कब्जा है, तो उसकी जानकारी संबंधित विभाग को दें—क्योंकि आपकी एक सूचना, पूरे गांव का रास्ता बचा सकती है।

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