अमरोहा में पेंशनर्स का बड़ा प्रदर्शन: 10 सूत्रीय मांगों पर गरजी आवाज, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

शहीद पार्क कलेक्ट्रेट में 3 घंटे चला धरना, पेंशन सुधार और सुविधाओं को लेकर सरकार पर बढ़ा दबाव
✍️ अवनीश त्यागी | TargetTvLive
📍 अमरोहा | 21 अप्रैल 2026
जनपद अमरोहा में पेंशनर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय पेंशनर फेडरेशन और सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के संयुक्त बैनर तले शहीद पार्क कलेक्ट्रेट में एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया, जिसमें जिले भर से बड़ी संख्या में पेंशनर्स ने भाग लिया।
सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस धरना-प्रदर्शन के बाद पेंशनर्स ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा। यह कदम सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या हैं पेंशनर्स की प्रमुख मांगें?
हालांकि प्रेस विज्ञप्ति में मांगों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन आमतौर पर पेंशनर्स की प्रमुख मांगों में शामिल रहते हैं:
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
- महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि
- पेंशन विसंगतियों का निस्तारण
- चिकित्सा सुविधाओं में सुधार
- पारिवारिक पेंशन को मजबूत करना
👉 विशेषज्ञ मानते हैं कि देशभर में पेंशनर्स के आंदोलन इसी तरह की मांगों के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं, जिससे यह मुद्दा धीरे-धीरे राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनता जा रहा है।
धरना सभा में क्या बोले नेता?
धरना सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष अनूप सिंह पैसल ने कहा कि “सरकार को पेंशनर्स की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि यह वर्ग देश की सेवा कर चुका है।”
वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवेंद्र सिंह चिकारा ने संचालन करते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सभा में राजेंद्र सिंह राणा, शिवनाथ सिंह प्रजापति, कुंवर पाल सिंह, सोमदत्त सिंह, प्रहलाद सिंह, गजराम सिंह, खुर्शीद हैदर जैदी, योगेंद्र सिंह, भोपाल सिंह तोमर, जाबिर अली, अमीपाल सिंह, शिशुपाल सिंह चौहान, महेंद्र सिंह, योगेंद्र शर्मा, सुभाष चंद्र, काकुल गुप्ता, लोकेंद्र सिंह और सुभाष चंद सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
विश्लेषण: क्यों बढ़ रही हैं पेंशनर्स की आवाज?
देशभर में पेंशनर्स के आंदोलनों में तेजी देखी जा रही है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
- बढ़ती महंगाई और स्थिर पेंशन
- स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
- नई और पुरानी पेंशन योजनाओं के बीच असमानता
👉 अमरोहा का यह धरना इसी राष्ट्रीय ट्रेंड का हिस्सा है, जो आने वाले समय में सरकार के लिए एक बड़ी नीति चुनौती बन सकता है।
प्रशासन की भूमिका और आगे का रास्ता
ज्ञापन को अपर जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार तक भेजा गया है। अब देखना होगा कि:
- क्या सरकार इन मांगों पर कोई ठोस कदम उठाती है
- या पेंशनर्स को अपने आंदोलन को और व्यापक बनाना पड़ेगा
अमरोहा में हुआ यह धरना सिर्फ एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि देशभर में उभर रहे पेंशनर्स असंतोष का संकेत है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।
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