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10 साल से फाइलों में दबा आदेश, जमीन पर कब्जा जारी—बिजनौर में बड़ा खुलासा”

“बिजनौर में सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल! 10 साल से आदेश धूल खा रहे, अब किसान यूनियन ने दी आर-पार की लड़ाई की चेतावनी”

बिजनौर में ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जा: 2016–17 के आदेश बेअसर, किसान यूनियन ने CM से मांगा एक्शन

बिजनौर के लुहारपुरा गांव में ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला गरमाया। पुराने आदेशों के बावजूद कार्रवाई न होने पर किसान यूनियन ने आंदोलन की चेतावनी दी। जानिए पूरा मामला।

  • ग्राम समाज की जमीन (खसरा 203/1, 205) पर कब्जे का आरोप

  • SDM की अनुमति के बावजूद रुका विकास कार्य

  • 2016 और 2017 के प्रशासनिक आदेशों का नहीं हुआ पालन

  •  शिकायतकर्ता का थाना चांदपुर ने किया शांतिभंग की धाराओं में किया चालान

  • CM योगी आदित्यनाथ से सीधा हस्तक्षेप मांग

📍 ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: कहां से भड़का विवाद?

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर तहसील अंतर्गत ग्राम लुहारपुरा में ग्राम समाज की भूमि पर कब्जे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

भारतीय किसान यूनियन (भानु) के जिला नेतृत्व द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि खसरा संख्या 203/1 और 205 जैसी सार्वजनिक भूमि पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा जमा लिया है।

यह वही जमीन है, जहां ग्राम पंचायत द्वारा विकास कार्य प्रस्तावित था और SDM चांदपुर से इसकी अनुमति भी मिल चुकी थी।

जब सिस्टम फेल हो जाए: आदेश हैं, कार्रवाई नहीं!

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि:

  • 30 अप्रैल 2016 को तहसीलदार ने कब्जा हटाने का आदेश दिया
  • 19 जनवरी 2017 को जिलाधिकारी ने कार्रवाई के निर्देश दिए

👉 लेकिन करीब एक दशक बाद भी जमीन कब्जा मुक्त नहीं हो सकी

यह प्रशासनिक सुस्ती या मिलीभगत—दोनों पर सवाल खड़े करता है।

रुका विकास, बढ़ा आक्रोश

ग्रामीणों के अनुसार:

  • कब्जे के चलते पंचायत का निर्माण कार्य ठप पड़ा है
  • सार्वजनिक उपयोग की जमीन निजी कब्जे में जा रही है
  • गांव में रास्ते, सामुदायिक सुविधाएं और विकास प्रभावित हो रहे हैं

👉 इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।

पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

ज्ञापन में साफ आरोप है कि:

  • थाना चांदपुर पुलिस ने मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की
  • 15 मार्च 2026 को शिकायतकर्ता को भेजा जेल
  • इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई समाधान नहीं निकला

👉 इससे कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जमीन पर चल रहा अवैध निर्माण

ग्रामीणों का दावा है कि कब्जाधारी न केवल जमीन पर बैठे हैं, बल्कि:

  • लगातार अवैध निर्माण भी कर रहे हैं
  • इससे कब्जा और मजबूत होता जा रहा है

👉 अगर समय रहते रोक नहीं लगी, तो स्थिति और जटिल हो सकती है।

किसान यूनियन का अल्टीमेटम: अब होगा बड़ा आंदोलन

भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने साफ चेतावनी दी है:

“अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान यूनियन और ग्रामवासी बड़ा जनआंदोलन शुरू करेंगे।”

👉 यह चेतावनी प्रशासन के लिए बड़ा संकेत मानी जा रही है।

एक्सपर्ट एनालिसिस: क्यों बना बड़ा मुद्दा?

यह मामला तीन बड़े सवाल खड़े करता है:

1️⃣ प्रशासनिक विफलता

आदेश होने के बावजूद कार्रवाई न होना शासन प्रणाली पर सवाल उठाता है

2️⃣ ग्राम विकास पर संकट

सार्वजनिक परियोजनाएं रुकना सीधे ग्रामीण विकास को प्रभावित करता है

3️⃣ भूमि माफिया का खतरा

अगर समय पर कार्रवाई न हो, तो ऐसे कब्जे संगठित रूप ले सकते हैं

अब क्या होगा? संभावित कार्रवाई

विशेषज्ञों के अनुसार प्रशासन कर सकता है:

  • राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम से जांच
  • अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई
  • दोषियों पर FIR और कानूनी कार्रवाई
  • जमीन को पुनः ग्राम समाज के उपयोग में लाना

निष्कर्ष: अब निगाहें सरकार पर

बिजनौर का यह मामला अब केवल स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन इस पर कितनी तेजी से और कितना सख्त एक्शन लेते हैं।

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