“खेती से खनन तक: बिजनौर के ट्रैक्टरों की बदलती कहानी”
कृषि कार्य के नाम पर पंजीकरण, पर इस्तेमाल माफिया के धंधे में; प्रशासन अब अलर्ट
जिलाधिकारी की सख्ती, सीमा क्षेत्रों पर निगरानी और अपंजीकृत वाहनों पर होगी कार्रवाई
बिजनौर, 27 सितंबर 2025।
जनपद में मिट्टी का अवैध खनन प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है। खास बात यह है कि कृषि कार्यों के लिए पंजीकृत अधिकांश ट्रैक्टर अब खनन माफिया का औजार बन चुके हैं। यही वजह है कि सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।
शनिवार को जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में इस गंभीर मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वान्या सिंह, डीएफओ, जिला पंचायत राज अधिकारी और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
खेती के नाम पर खनन का धंधा
बिजनौर में हजारों की संख्या में ट्रैक्टर कृषि प्रयोजन के लिए पंजीकृत हैं। नियमों के अनुसार इनका इस्तेमाल सिर्फ खेतों में होना चाहिए, लेकिन हकीकत इसके उलट है।
- ये ट्रैक्टर खनन माफिया को किराए पर चलाए जा रहे हैं।
- रोजाना मिट्टी और बालू के परिवहन में इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है।
- परिणामस्वरूप राजस्व की भारी हानि के साथ सड़कों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
जिलाधिकारी ने बैठक में स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में अब शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी।
सख्त आदेश: पंजीकृत और नंबर प्लेट वाले वाहन ही मान्य
जिलाधिकारी ने कहा कि मिट्टी उठान की अनुमति केवल जरूरत के अनुसार ही दी जाएगी और परिवहन सिर्फ पंजीकृत वाहनों से होगा। यदि कोई अपंजीकृत वाहन या फर्जी नंबर प्लेट के साथ पाया गया तो उसे तुरंत जब्त कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उत्तराखंड सीमा पर बढ़ेगी चौकसी
खनन सामग्री का बड़ा हिस्सा उत्तराखंड की ओर से आने-जाने की आशंका जताई गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी उप जिलाधिकारी संभावित मार्गों पर नियमित चेकिंग अभियान चलाएं।
- चेक पोस्ट पर कर्मचारियों की लगातार ड्यूटी लगाई जाएगी।
- वाहनों का रजिस्टर मेंटेन करना अनिवार्य होगा।
- सीमा क्षेत्रों और आशंकित इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जाएगी।
विश्लेषण: क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?
खनन से होने वाला राजस्व जिले के विकास कार्यों में खर्च होना चाहिए, लेकिन खेती के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर जब खनन माफिया के हाथों में चले जाते हैं तो सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये का नुकसान होता है।
-
पर्यावरणीय खतरा: नदियों और नालों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है।
-
बुनियादी ढांचे पर असर: ओवरलोड ट्रैक्टर सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं।
-
सामाजिक दुष्परिणाम: स्थानीय स्तर पर छोटे किसान भी दबाव में आकर अपने ट्रैक्टर किराए पर देने को मजबूर होते हैं।
बिजनौर में खनन की हकीकत
- पंजीकृत ट्रैक्टर (कृषि प्रयोजन): लगभग 40,000+
- अवैध रूप से उपयोग में आने वाले ट्रैक्टर: अनुमानित 30% से अधिक
- सरकार को राजस्व नुकसान: ₹15–20 करोड़ प्रतिमाह (अनुमानित)
- हाल ही में जब्त वाहन: 150+ (पिछले 6 माह में)
- मुख्य प्रभावित क्षेत्र: गंगा किनारा, अफजलगढ़, नगीना, बढ़ापुर, सीमावर्ती क्षेत्र
जिलाधिकारी का सख्त संदेश
“खनन चाहे अपंजीकृत वाहन से हो या खेती के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर से, किसी को नहीं छोड़ा जाएगा। सीमा क्षेत्रों और चेक प्वाइंट्स पर चौकसी बढ़ाई जाएगी।”
— जसजीत कौर, जिलाधिकारी बिजनौरनिष्कर्ष: प्रशासन की सख्ती, माफियाओं की नींद हराम
अब देखना यह है कि यह सख्ती जमीनी स्तर पर किस हद तक असर दिखाती है। क्या वास्तव में अवैध खनन पर अंकुश लगेगा या फिर माफिया नए रास्ते तलाश लेंगे? जनता की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।












